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धनबाद से खराब रांची की हवा, झारखंड के शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए लगेंगे विशेष सेंसर

Published: Sat, 12 Sep 2026 09:00 AM (IST)Updated: Sat, 12 Sep 2026 09:55 AM (IST)

झारखंड के शहरों में वायु शुद्धता बनाए रखने के लिए नगर निगम क्षेत्रों में विशेष सेंसर लगाए जाएंगे। इससे प्रदूषण ...और पढ़ें

राज्य के नगर निगम क्षेत्रों में प्रदूषण की पहचान करने वाले सेंसर लगेंगे। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

राज्य के नगर निगम क्षेत्रों में प्रदूषण की पहचान करने वाले सेंसर लगेंगे। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. नगर निगम क्षेत्रों में वायु शुद्धता निगरानी हेतु विशेष सेंसर लगेंगे।

  2. सेंसर हवा में हानिकारक रसायनों और प्रदूषण की पहचान करेंगे।

  3. रांची और जमशेदपुर की वायु शुद्धता राष्ट्रीय औसत से कम।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड के शहरों की वायु शुद्धता स्तर को सुरक्षित बनाने के लिए नगर निगम क्षेत्रों में विशेष निगरानी होगी। प्रत्येक महीने वायु शुद्धता के इन आंकड़ों पर नजर रखने के लिएस लाख और पांच लाख की आबादी वाले शहरों में विशेष सेंसर लगाए जाएंगे।

क्षमता और संभावित प्रदूषण के कारणों के हिसाब से इन सेंसर की कीमत तीन से सात लाख रुपए तक होती है। जैसे औद्योगिक और खनन वाले क्षेत्र में हानिकारक रसायन और हवा में अयस्कों के कण पहचान करने वाले सेंसर महंगे आते हैं।

जबकि कालोनी और स्टेट हाइवे पर लगने वाले सेंसर कम कीमत के होते हैं। पिछले दिनों केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों में रांची और जमशेदपुर की वायु शुद्धता राष्ट्रीय औसत से बहुत नीचे मापी गई थी।

केंद्रीय वायु शुद्धता नियंत्रण संस्थान के तकनीकी विशेषज्ञ अजय राय ने बताया कि झारखंड में धनबाद की तुलना में रांची की हवा अधिक प्रदूषित है। संस्थान द्वारा विकसित किया गया सेंसर इसकी पहचान करेगा। धनबाद में खनन गतिविधियों के बाद भी रांची की तुलना में हवा की शुद्धता का अधिक रहना वहां के प्रशासन द्वारा उठाए गए मानकों की वजह से है।

जबकि रांची में अधिक आबादी की वजह से हवा का प्रदूषण बढ़ा हुआ है। अजय राय ने बताया कि धनबाद में ही शहरी क्षेत्र की तुलना में गोविंदपुर के औद्योगिक क्षेत्र की हवा अधिक प्रदूषित है।

औद्योगिक और सामान्य प्रदूषण दोनों पर नियंत्रण की होगी कोशिश

राज्य सरकार ने शहरों में औद्योगिक और सामान्य प्रदूषण को कम करने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। नगर विकास विभाग और वन एवं पर्यावरण विभाग ने इसके लिए संयुक्त रणनीति बनाई है।

जमशेदपुर और चाईबासा में वायु प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक पाया गया है। पलामू, गढ़वा और देवघर में प्लास्टिक जलाने, कचरा प्रबंधन की कमी की वजह से वायु प्रदूषण का सबसे अधिक होना पाया गया है।

शहरी क्षेत्रों में वायु शुद्धता की निगरानी पहले भी होती रही है। अब इन आंकड़ों को दर्ज कर तत्काल सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे। शहरों में पीएनजी जैसे सुविधाओं के विस्तार से प्रदूषण मानक कम होने चाहिए। अब सेंसर के जरिए इनके रीयल टाइम आंकड़े संग्रहित होंगे।

-अजय राय, तकनीकी विशेषज्ञ, केंद्रीय वायु प्रदूषण नियंत्रण संस्थान

झारखंड के शहरों के वायु मानक आंकड़े

धनबाद- 132
हजारीबाग-107
जमशेदपुर- 153
देवघर- स्वास्थ्यकर