चाईबासा, [सुधीर पांडेय]। कोरोना वायरस का संक्रमण और उसके बाद लॉकडाउन होने से देश में लाखों लोगों का रोजगार छिन गया। हालांकि इस विपरीत परिस्थिति में भी कुछ लोगों ने सफलता की ऊंचाइयों को हासिल किया। इन्‍हीं में से एक हैं झारखंड के चाईबासा जिले के खुंटपानी प्रखंड के पंडाबीर पंचायत के रांगामाटी गांव के किसान राम जोंको। इन्‍होंने अपनी मेहनत से इस विपरीत स्थिति का सामना किया और अपने दम पर पपीता के 3 हजार पेड़ लगाए। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद राम जोंको ने लॉकडाउन अवधि के चार माह में पपीता की खेती कर 50 टन पपीता का उपज तैयार कर लिया है।

पपीता को अब बाजार में बेचने के लिए राम जोंको बड़ी मंड़ी से संपर्क करने में लगे हुए हैं। यदि वे 20 रुपया प्रति किलो भी पपीता को बेचते हैं तो 10 लाख रुपये की कमाई आसानी से हो जाएगी। जबकि मार्केट में 40 रुपया किलो पपीता बेचा जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए किसान राम जोंको ने कहा कि लॉकडाउन अवधि में जेटीडीएस संस्था की ओर से सहयोग कर तीन हजार पपीता का पौधा लगाया। वर्तमान समय में 800 पेड़ में पपीता तैयार है। इसमें लगभग 20 टन पपीता बाजार में जाने को तैयार है।

बाकि 22 सौ पौधों में भी पपीता का फल लग चुका है। इस हिसाब से देखें तो यदि पौधा खराब होता है, तब भी 50 टन पपीता की उपज मिलेगी। लॉकडाउन अवधि में जहां लोगों को रोजगार के लिए काफी भटकना पड़ा है, वहीं अपनी जमीन में मेहनत करके पपीता के हजारों पौधों को तैयार किया। जेटीडीएस संस्था से पूरा सहयोग मिला। बाजार के लिए भी संस्था से संपर्क किया है। अच्छा खरीददार मिलने से दाम में कुछ समझौता भी किया जाएगा। पपीता की क्वालिटी काफी उच्च है। बड़े शहरों में अच्छे दाम में पपीता पहुंच सकता है।

एक सीजन में 8 से 10 लाख रुपये की आमदनी का अनुमान है। इस संबंध में जानकारी देते हुए जेटीडीएस संस्था के जेईई दानिश कमर ने कहा कि संस्था की ओर से किसानों को पपीता की खेती के लिए प्रशिक्षण से लेकर बीज, खाद, दवा, पंपसेट समेत सभी चीजें उपलब्ध कराई गई। तीन हजार पपीता का पेड़ तैयार हो चुका है। इससे लगभग 50 टन से अधिक पपीता के उत्पादन होने का अनुमान है। किसान राम जोंको ने अपनी मेहनत से दूसरे किसानों के लिए मिसाल कायम की है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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