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कैंपा फंड की अगली किस्त के लिए झारखंड को देना होगा पिछली राशि का हिसाब, उपयोगिता प्रमाणपत्र के अभाव में रुके 300 करोड़

Published: Fri, 28 Aug 2026 05:55 PM (IST)

झारखंड को कैंपा फंड की अगली किस्त (350 करोड़ रुपये) प्राप्त करने के लिए 67 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाणपत्र ...और पढ़ें

अगली किस्त हेतु 67 करोड़ के उपयोगिता प्रमाणपत्र की आवश्यकता।

अगली किस्त हेतु 67 करोड़ के उपयोगिता प्रमाणपत्र की आवश्यकता।

HighLights

  1. अगली किस्त हेतु 67 करोड़ के उपयोगिता प्रमाणपत्र की आवश्यकता।

  2. फंड का उपयोग वनीकरण, वन्यजीव प्रबंधन और स्थानीय विकास में होगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। केंद्र सरकार ने वन एवं पर्यावरण विभाग को क्षतिपूर्ति वनरोपण योजना यानी कैंपा फंड के तहत इस वित्तीय वर्ष में मिलने वाली राशि उपयोगिता प्रमाणपत्र के अभाव में रुकी पड़ी है। इस वित्तीय वर्ष में इस फंड के तहत 1777.93 करोड़ रुपये राज्य को मिलने हैं।

इनमें लगभग 270 करोड़ रुपये मिले हैं। इस राशि के खर्च का उपयोगिता प्रमाणपत्र ही केंद्र को देना है। इसका उपयोगिता प्रमाणपत्र देने पर राज्य को अगली किस्त के रूप में लगभग 300 करोड़ रुपये मिलेंगे।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी केंद्र सरकार की तरफ से राज्य को कैंपा फंड के तहत 654.62 करोड़ की राशि दी गई थी। लेकिन इनमें से सिर्फ 275.78 करोड़ की राशि ही खर्च हो सकी थी। 378.84 करोड़ की राशि केंद्र को वापस करनी पड़ी थी। बता दें कि इस फंड के तहत केंद्र से राशि तीन किस्तों में मिलती है।

वनीकरण, वन्यजीव प्रबंधन, इकोलाजी सिस्टम में सुधार और वनक्षेत्र में रहने वाले स्थानीय समुदाय के जीवनस्तर को सुधारने में यह राशि खर्च होनी है। पिछले छह वर्षों में कई बार केंद्र से मिली राशि पूरी तरह खर्च नहीं हो पाई और राशि सरेंडर करनी पड़ी। इस फंड के तहत राज्य को केंद्र से कुल तीन हजार करोड़ रुपये मिलने हैं।

मुख्यमंत्री ने कैंपा की राशि पारदर्शी तरीके से खर्च करने का दिया निर्देश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैंपा फंड की पिछले दिनों समीक्षा करते हुए इसका लाभ स्थानीय समुदाय के विकास में करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कैंपा के तहत ली गई योजनाओं को समय पर पूरा करने और इसके पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए विभाग के अधिकारियों से काम करने को कहा है।

कैंपा फंड की राशि खर्च करने के लिए राज्य सरकार ने वन एवं पर्यावरण विभाग के साथ एक कमेटी का गठन किया है जिसमें वानिकी के साथ सामाजिक कार्यों के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।