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झारखंड की चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक को मिली कैबिनेट की मंजूरी, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर होगा संचालन

Published: Thu, 24 Sep 2026 09:00 PM (IST)

झारखंड कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य की चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक के संचालन को मंजूरी ...और पढ़ें

सुनवाई के दौरान सरकार ने हाई कोर्ट को दी जानकारी।

सुनवाई के दौरान सरकार ने हाई कोर्ट को दी जानकारी।

HighLights

  1. चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक संचालन की कैबिनेट मंजूरी।

  2. ओपन जेल विस्तार हेतु हजारीबाग में 32 एकड़ भूमि चिह्नित।

  3. कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना मुख्य उद्देश्य।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में राज्य के ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट (ओपन जेल) में कैदियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और इसकी नियमित निगरानी को लेकर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि राज्य के चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक के संचालन की अनुमति कैबिनेट से मिल चुकी है।

ओपन जेल के संचालन, सुविधाओं और इसके विस्तार से संबंधित त्रैमासिक रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाएगी। यह रिपोर्ट तीन नवंबर तक कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को निर्धारित की है।

हजारीबाग में 32 एकड़ जमीन चिह्नित

पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि ओपन जेल के विस्तार के लिए हजारीबाग में 32 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की गई है। इस जमीन पर ओपन जेल के विस्तार से संबंधित प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है। इसके अलावा महिला कैदियों के लिए भी ओपन जेल में विशेष व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर कमेटी में राज्य की तत्कालीन गृह सचिव वंदना दादेल का नाम भी नामित किया गया है। हाई कोर्ट ने इससे पहले निर्देश दिया था कि जब तक स्थायी सेंट्रल ओपन जेल का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक रांची, हजारीबाग, दुमका सहित चार सेंट्रल जेलों में अस्थायी रूप से ओपन जेल की व्यवस्था की जाए।

कैदियों को मुख्यधारा से जोड़ना उद्देश्य

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को ओपन जेल की व्यवस्था और निगरानी के लिए गृह विभाग के स्तर पर कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। कमेटी को ओपन जेलों की नियमित निगरानी के साथ वहां कैदियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी काम करना है।

इनमें जिम, चिकित्सा सुविधा, बेहतर भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। ओपन जेल की व्यवस्था का उद्देश्य कैदियों को जेल की बंद व्यवस्था से बाहर नियंत्रित वातावरण में रखकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और पुनर्वास के लिए तैयार करना है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा है।