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झारखंड में 7 साल में MBBS सीटें 580 से बढ़कर 1650 हुईं, दो साल में डॉक्टरों की कमी दूर का लक्ष्य

Published: Thu, 29 Oct 2026 11:45 AM (IST)

झारखंड सरकार ने डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि ...और पढ़ें

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और अपर मुख्य सचिव की बैठक में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर मंथन।

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और अपर मुख्य सचिव की बैठक में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर मंथन।

HighLights

  1. एमबीबीएस सीटें 580 से बढ़कर 1650 हुईं।

  2. दो साल में डॉक्टरों की कमी दूर करने का लक्ष्य।

  3. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और ग्रामीण स्वास्थ्य पर जोर।

जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने और चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दावा किया है कि आने वाले दो वर्षों में राज्य में डॉक्टरों की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और झारखंड इस दिशा में आत्मनिर्भर बनने की ओर आगे बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाना स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के बीच करीब चार घंटे तक चली बैठक में मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों के विस्तार, चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक बनाने और भविष्य में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।

सात साल में एमबीबीएस सीटों में करीब तीन गुना वृद्धि

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में झारखंड में एमबीबीएस की कुल 580 सीटें थीं। वर्ष 2026-27 में इनकी संख्या बढ़कर 1650 हो गई है। यानी इस अवधि में 1070 सीटों की वृद्धि हुई है।

इससे राज्य के विद्यार्थियों को मेडिकल की पढ़ाई के अधिक अवसर मिलने का दावा किया जा रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी सीटें बढ़ाई गई हैं। रिम्स, रांची में एमबीबीएस की सीटें 180 से बढ़ाकर 250, शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद में 50 से 100 और एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में 50 से 150 की गई हैं।

दुमका, पलामू और हजारीबाग के मेडिकल कॉलेजों में 100-100 सीटें उपलब्ध हैं। निजी क्षेत्र में भी चिकित्सा शिक्षा का विस्तार हुआ है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में सीटें 150 से बढ़कर 250, लक्ष्मी चंद्रवंशी मेडिकल कॉलेज, पलामू में 100 से 150 और नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सरायकेला में 100 से बढ़कर 200 हो गई हैं।

सिर्फ सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं, सुविधाएं भी मजबूत करनी होंगी

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चिकित्सकों की कमी का स्थायी समाधान मेडिकल कॉलेजों की संख्या और सीटें बढ़ाने के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा बेहतर प्रशिक्षण सुनिश्चित करने से ही संभव है।

झारखंड के विद्यार्थियों को अपने राज्य में मेडिकल की बेहतर पढ़ाई का अवसर मिलना चाहिए। इसके साथ आधुनिक चिकित्सा तकनीक की जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल मेडिकल सीटें बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें गरीब मरीजों को डॉक्टर और बेहतर इलाज के अभाव में परेशान नहीं होना पड़े। अधिक योग्य डॉक्टर तैयार होने से सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी।

शिक्षकों और अस्पतालों के बुनियादी ढांचे पर जोर

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि एमबीबीएस सीटों में वृद्धि के साथ मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता, अस्पतालों का आधारभूत ढांचा, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता मजबूत करना भी जरूरी है।

राज्य में ऐसे चिकित्सक तैयार करने पर ध्यान देना होगा, जो योग्य होने के साथ संवेदनशील भी हों और मरीजों को बेहतर सेवाएं दे सकें। स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों और पूरी टीम के समन्वित प्रयासों से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है।

अब सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों की उपलब्धता

एमबीबीएस सीटों में वृद्धि से आने वाले वर्षों में राज्य में डॉक्टरों की संख्या बढ़ने की संभावना है, लेकिन इसका सीधा लाभ सरकारी अस्पतालों और ग्रामीण क्षेत्रों को तभी मिलेगा, जब मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ें।

इसके लिए शिक्षकों और प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के साथ चिकित्सकों की नियुक्ति, पदस्थापन और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा। सरकार का लक्ष्य चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती से जोड़ना है।

अब इस दिशा में होने वाली प्रगति इस बात से भी आंकी जाएगी कि बढ़ी हुई सीटों के अनुरूप डॉक्टर तैयार करने और उन्हें जरूरत वाले अस्पतालों तक पहुंचाने में कितनी सफलता मिलती है।