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झारखंड में अब एक कॉल पर मिलेगा रक्त, मरीजों को चार घंटे में होगी आपूर्ति; चाईबासा HIV प्रकरण से सबक

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:15 PM (IST)Updated: Thu, 17 Sep 2026 03:22 PM (IST)

झारखंड में मरीजों को अब रक्त के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, क्योंकि 'एक कॉल पर रक्त' सेवा तीन महीने में ...और पढ़ें

एमएस साइंस कंपनी को सौंपी गई जिम्मेदारी, तीन माह में शुरू होगी व्यवस्था।

एमएस साइंस कंपनी को सौंपी गई जिम्मेदारी, तीन माह में शुरू होगी व्यवस्था।

HighLights

  1. झारखंड में मरीजों को अब एक कॉल पर रक्त मिलेगा।

  2. एमएस साइंस कंपनी चार घंटे के भीतर रक्त पहुंचाएगी।

  3. स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में अब मरीजों एवं घायलों को रक्त के लिए ब्लड बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्हें महज एक कॉल पर चार घंटे के भीतर खून उपलब्ध हो जाएगा, जिससे समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बचाई जा सकेगी। राज्य में यह व्यवस्था अगले तीन महीने के भीतर शुरू हो जाएगी।

राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने रक्त के संग्रहण से लेकर उसे अस्पतालों तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी एमएस साइंस कंपनी को सौंपी है। बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की उपस्थिति में विभाग और कंपनी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

गौरतलब है कि झारखंड में अक्सर ब्लड बैंकों में रक्त की कमी और समय पर खून न मिलने की समस्या सामने आती रही है। कई बार मरीजों के स्वजनों को एक ब्लड बैंक से दूसरे ब्लड बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं और लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

अब इस नई व्यवस्था से इन सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी और निजी अस्पतालों में रक्त की सुलभता सुनिश्चित करना और रक्त की कमी के कारण मरीजों को होने वाली परेशानियों को कम करना है।

रांची से कमांड सेंटर के जरिए होगा संचालन

मरीजों के कॉल करने पर चार घंटे के भीतर रक्त उपलब्ध कराने के लिए जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था के संचालन के लिए रांची में एक कमांड सेंटर स्थापित किया जाएगा।

कंपनी ब्लड कलेक्शन, उसकी जांच, स्टोरेज (संग्रहण), रखरखाव और संबंधित अस्पताल तक सुरक्षित रूप से खून पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालेगी। एमओयू के प्रावधानों के तहत रक्त संग्रह के लिए कंपनी खुद रक्तदान शिविरों का आयोजन करेगी।

इसमें स्वास्थ्य विभाग की ओर से तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा, जबकि मानव संसाधन (मैनपावर) और अन्य सभी व्यवस्थाएं कंपनी खुद जुटाएगी। कंपनी को प्रति यूनिट ब्लड के आधार पर भुगतान किया जाएगा।

नहीं दोहराई जाएगी चाईबासा जैसी घटना

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस अवसर पर कहा कि राज्य में पहली बार इस तरह की अनूठी व्यवस्था शुरू की जा रही है, जिससे मरीजों को समय पर रक्त मिल सकेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रक्त की जांच हर हाल में निर्धारित मानकों के अनुरूप ही की जानी चाहिए।

चाईबासा की एक पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में मरीज को बिना जांच किया हुआ रक्त नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। सरकार मरीजों को सुरक्षित और समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

वहीं, विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा एनसीसी, एनएसएस, पुलिस बल और निजी रक्तदान शिविरों के माध्यम से भी रक्त का संग्रह किया जाएगा। इसके लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। रक्तदान शिविरों में आने वाले रक्तदाताओं के लिए रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था भी एजेंसी द्वारा ही की जाएगी।

एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि अगले 90 दिनों के दौरान रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी और कंपनी के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

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