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महिला आरक्षण के मुद्दे ने BJP में फूंकी नई जान, झारखंड में लंबे समय के बाद दिखी एकजुटता

Published: Sun, 26 Apr 2026 12:16 AM (IST)

झारखंड भाजपा महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर मोरहाबादी मैदान में 'महिला आक्रोश रैली' के माध्यम से एकजुट हुई।

झारखंड बीजेपी में एकजुटता। फोटो X/BJPJharkhand

झारखंड बीजेपी में एकजुटता। फोटो X/BJPJharkhand

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दिव्यांशु, रांची। महिला आरक्षण विधेयक संसद में पारित नहीं हो पाया, लेकिन लंबे समय से बिखरी पड़ी झारखंड भाजपा को इसने एकजुट जरूर कर दिया। शनिवार को मोरहाबादी मैदान में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू आक्रोश रैली में आई महिला कार्यकर्ताओं से गर्मी से बचने के लिए पेड़ की छांव में आने का अनुरोध कर रहे थे, तो पुरुष कार्यकर्ताओं को धूप में भी बने रहने की सलाह दे रहे थे।

चाईबासा से लेकर रामगढ़ तक की महिला नेता और कार्यकर्ता जब मंच पर बोल रही थीं तो नागपुरी, सादरी और संताली बोल अभिव्यक्त हो रहे थे। मंच के ठीक नीचे कतार से पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और मधु कोड़ा बैठे थे। अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा और मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा आक्रोश रैली की कमान मंच पर संभाले हुए थीं।

डायन प्रथा के खिलाफ अभियान चलाने वाली पद्मश्री छुटनी महतो ने कहा कि कांग्रेस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। पद्मश्री जमुना टुडू ने भी महिला आरक्षण विधेयक गिराने के लिए कांग्रेस पर दोष देते हुए कहा कि जनता कभी माफ नहीं करेगी।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें व्यापार वाणिज्य से जुड़ी महिलाएं भी आईं और दैनिक मजदूरी करने वाली कामगार भी। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर प्रदेश भाजपा को दो आंदोलन वापस लेने पडे थे। लेकिन महिला आक्रोश रैली ने संगठन की धार को फिर से तेज करने का काम किया।

अन्नपूर्णा देवी ने किया महिला आक्रोश रैली का नेतृत्व

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मोरहाबादी से अलबर्ट एक्का चौक तक निकले आक्रोश मार्च का नेतृत्व किया। प्रदेश भाजपा के सभी बड़े नेता मार्च के साथ कतार में चलते रहे।

कार्यक्रम को शांतिपूर्ण रखने की प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अपील का असर कार्यकर्ताओं पर रहा। संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह बिना किसी तामझाम के पूरे कार्यक्रम की निगरानी करते रहे। महिलाओं को सत्तू और पानी पिलाने से लेकर उनके भोजन तक की व्यवस्था भी उम्दा थी।

आदिवासी समाज की महिलाओं की रही उपस्थिति

महिला आक्रोश रैली में आदिवासी समाज की महिलाओं की बड़ी भागीदारी थी। खूंटी से आई कामिनी किड़ो ने कहा कि परिसीमन से सीटें बढ़ेंगी तो आदिवासी महिला को लाभ होगा, उनका सदन में प्रतिनिधित्व होगा।

ओरमांझी में महिला मंडल की सदस्य बासंती उरांव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के रहते महिला आरक्षण का पास नहीं होना दुखद है।

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