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झारखंड की मेडल विजेता सपना कुमारी के टूटे अरमान, खेल नीति से परेशान होकर पड़ोसी राज्य में बनी SI

Published: Sun, 07 Jun 2026 11:48 AM (IST)

झारखंड के खिलाड़ी उचित सम्मान और नौकरी न मिलने के कारण पड़ोसी राज्य बिहार का रुख कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय ...और पढ़ें

एथलीट सपना कुमारी (फाइल फोटो)

एथलीट सपना कुमारी (फाइल फोटो)

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जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड में खिलाड़ी पूरी मेहनत और लगन के साथ पदक जीतते है, लेकिन जब नौकरी की बात आती है तो उनके हाथ खाली रह जाते हैं। उचित सम्मान के आभाव में अब यहां के खिलाड़ी पड़ोसी राज्य बिहार का रूख कर रहे हैं।

झारखंड के घाटो की रहने वाली सपना कुमारी ने सपने में भी ये नहीं सोचा था कि उसे एक दिन उसी राज्य को छोड़कर जाना पड़ेगा जहां उसका बचपन बीता और जहां उसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता।

लेकिन जब नौकरी की बात आयी तो सपना से कहा गया कि वो तो बिहार की रहने वाली है उसे यहां नौकरी कैसे मिलेगी। परेशान होकर सपना ने बिहार का रूख किया और अब वो वहां सब इंस्पेक्टर बनने वाली है। ये कहानी झारखंड में केवल सपना की नहीं है, बल्कि झारखंड के पांच से छह राष्ट्रीय स्तर के एथलीट झारखंड से एनओसी लेकर बिहार जा चुके हैं।

सपना सहित कई खिलाड़ियों ने किया बिहार का रूख, लिया एनओसी

झारखंड की रहने वाली अंतरराष्ट्रीय एथलीट सपना कुमार ने तीन साल पहले 2023 में झारखंड से एनओसी लेकर बिहार चली गयी और अब वहां का प्रतिनिधित्व करने लगी है। जिसके बाद सपना को वहां बिहार सरकार ने सब इंस्पेक्टर के पद प्रदान किया है।

हालांकि अभी तक ज्वाइनिंग नहीं हुई है लेकिन सारी तैयारी पूरी हो चुकी है। सपना से पहले लानबाल के चंदन कुमार सिंह, एथलेटिक्स की नेशनल मेडलिस्ट रिया कुमारी, विशाखा कुमारी और राहुल कुमार भी झारखंड की खेल नीति से तंग आकर झारखंड से एनओसी ले लिया है और बिहार की ओर से खेल रहे हैं। इसमें चंदन को पहले ही पदाधिकारी के रूप में नियुक्त हो चुके हैं। वहीं बाकी खिलाड़ियों को भी सीधी नियुक्ति देने की तैयारी है।

झारखंड में रहकर सपना बनी थी अंतरराष्ट्रीय एथलीट

सपना कुमारी ने झारखंड में रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर का मुकाम हासिल किया था। 2017 में राष्ट्रीय जूनियर एथलेटिक में नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। 2018 कोलंबो में सैफ एथलेटिक्स खेलों में स्वर्ण पदक, 2018 फेडरेशन कप में स्वर्ण, 2022 में राष्ट्रीय एथलेटिक्स में रजत, 2023 इंडियन ग्रैंड प्रिक्स में रजत और 2023 फेडरेशन कप में कांस्य पदक जीत चुकी है।

झारखंड से और खेल से हो रहा है खिलाड़ियों का मोहभंग

झारखंड सरकार की खेलनीति और यहां मिलने वाली सुविधाओं की कमी के कारण राज्य के खिलाड़ियों का मोहभंग हो रहा है। अब तक सैकड़ों की संख्या में खिलाड़ियों ने तंग आकर खेल छोड़ दिया या दूसरे राज्य का रूख कर लिया है।

रांची में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण जीत चुके धीरज पहाड़ी ने तंगहाली में खेल छोड़ दिया, वहीं सुविधाओं के आभाव में नेशनल स्वर्ण पदक विजेता रामचंद्र सांगा ने दूसरी राह पकड़ ली।

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