सहायक आचार्य नियुक्ति: सुप्रीम कोर्ट में 4 नवंबर को सुनवाई, बीआईटी मेसरा ने नॉर्मलाइजेशन को बताया सही
सुप्रीम कोर्ट में सहायक आचार्य नियुक्ति के संशोधित परिणाम जारी न करने पर 4 नवंबर को सुनवाई होगी, जहां झारखंड ...और पढ़ें

सहायक आचार्य नियुक्ति के संशोधित परिणाम जारी न करने पर 4 नवंबर को सुनवाई होगी।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट में सहायक आचार्य नियुक्ति पर 4 नवंबर को सुनवाई।
झारखंड सरकार ने संशोधित परिणाम जारी करने को समय मांगा।
बीआईटी मेसरा ने नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को सही बताया हाईकोर्ट में।
राज्य ब्यूरो, रांची। सुप्रीम कोर्ट में सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में संशोधित परिणाम जारी करने के आदेश का अनुपालन नहीं करने के मामले में दाखिल याचिका पर चार नवंबर को सुनवाई होगी। झारखंड सरकार की ओर से संशोधित परिणाम जारी करने के आदेश अनुपालन के लिए समय दिए जाने की मांग करते हुए एक आवेदन दाखिल किया गया है, लेकिन कोर्ट के रिकार्ड पर उपलब्ध नहीं होने के कारण मामले में अगली सुनवाई चार नवंबर को निर्धारित की गई है।
जस्टिस उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ में सुनवाई के दौरान पीठ ने 17 सितंबर के अपने विस्तृत आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि बिना किसी निषेध या बहिष्कार के, प्रशासनिक निर्देश के माध्यम से अधिक मेधावी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग में स्थानांतरित होने से नहीं रोका जा सकता।
साथ ही, 19 मई के आदेश में स्पष्ट किया गया था कि रिक्तियों की अनुपलब्धता का मुद्दा प्रासंगिक नहीं है, क्योंकि सभी श्रेणियों में रिक्तियां उपलब्ध हैं। पीठ ने झारखंड राज्य को संबंधित अधिकारियों के माध्यम से 19 जनवरी 2025 के निर्णय को चार सप्ताह के भीतर लागू करने का निर्देश दिया था, अन्यथा संबंधित अधिकारियों को पर अवमानना कार्यवाही करने की बात कही थी।
अदालत ने मुख्य सचिव को छह सप्ताह के भीतर अनुपालन शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई के दौरान झारखंड के वकील राजीव शंकर द्विवेदी ने बताया कि मुख्य सचिव की ओर से अनुपालन के लिए समय दिए जाने की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया गया है, लेकिन वह अभी रिकार्ड पर नहीं है।
बीआईटी मेसरा ने सहायक आचार्य नियुक्ति में नार्मलाइजेशन प्रक्रिया को बताया सही
हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति में लागू नार्मलाइजेशन नियम को चुनौती देने वाली गिरिधर रावत एवं अन्य की 103 याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान अदालत में बीआईटी मेसरा की ओर से शपथ पत्र के माध्यम से जांच रिपोर्ट दाखिल की गई। रिपोर्ट में कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में अपनाए गए नार्मलाइजेशन नियम को नियमानुसार सही बताया गया है।
अदालत ने मामले में विस्तृत सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तिथि निर्धारित की है। इससे पूर्व हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने बीआइटी मेसरा से यह जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था कि कर्मचारी चयन आयोग द्वारा सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया में अपनाया गया नार्मलाइजेशन नियम सही है या नहीं।
अदालत के इसी आदेश के आलोक में संस्थान की ओर से रिपोर्ट दाखिल की गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया है कि उनके अंक अधिक होने के बाद भी उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों का चयन नियुक्ति के लिए कर लिया गया, जबकि उन्हें चयनित नहीं किया गया।
प्रार्थियों का आरोप है कि कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अपनाए गए नार्मलाइजेशन नियम के कारण उनके अंकों में कमी आई, जिससे उनकी चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई। बताते चलें कि नार्मलाइजेशन की प्रक्रिया उन प्रतियोगिता परीक्षाओं में अपनाई जाती है जो अधिक अभ्यर्थी हाेने के कारण कई चरणों में अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए आयोजित की जाती है।
परीक्षा के प्रश्न किसी में आसान हो सकते हैं तो किसी में कठिन। इससे किसी अभ्यर्थी को नुकसान न हो, इसके लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाती है। सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा कुल 26,001 पदों के लिए हुई थी।
हालांकि योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण इन पदों के विरुद्ध लगभग 13 हजार अभ्यर्थियों की ही अनुशंसा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से की गई। इन सभी अनुशंसित अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी हो चुकी है।
