रांची, राज्य ब्यूरो। सरकार में आने से पूर्व सत्ताधारी दलों ने किसानों की दशा सुधारने को लेकर कुछ वादे किए थे। वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में उन वादों की झलक दिखेगी या नहीं, इस पर किसानों ही नहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा की भी निगाहें लगी हुई हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने किसानों की कर्जमाफी की घोषणा की थी। धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी दोनों दलों का रुख एक सा था। झामुमो ने राज्य की मुख्य फसल धान के लागत मूल्य का 150 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किए जाने का वादा किया था। धान का खरीद मूल्य 2300-2700 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की बात कही थी। वहीं कांग्रेस ने 2500 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य का वादा किया था।

झामुमो ने अपने निश्चय पत्र में किसान बैंक की स्थापना की बात कही थी। जहां किसान अपने उत्पादों को वाजिब दामों में बेच सकें। अनाज के साथ-साथ सब्जियों का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किए जाने की बात कही गई थी। सिंचाई के लिए खरीदे जाने वाले डीजल और बिजली पर अनुदान देने की भी घोषणा की गई थी। बोरिंग से सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली कनेक्शन देने की बात भी पार्टी ने कही थी। किसानों के उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक प्रखंड मुख्यालय में कोल्ड स्टोरेज खोलने और हर प्रखंड में मॉडल किसान स्कूल खोलने का वादा भी झामुमो ने किया था। कांग्रेस ने 60 वर्ष की आयु से अधिक किसानों को विशेष मासिक पेंशन देने का वादा भी किया था।

कमियों को छिपाएंगे नहीं, चुनौतियों का करेंगे सामना : बादल

राज्य के युवा कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख कृषि एवं इससे संबद्ध क्षेत्र की चुनौतियों को संभावना के रूप में देखते हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि चुनौतियों व आलोचनाओं को हम स्वीकार करते हैं। चीजों को छिपाने के बजाए उनका सामना करेंगे। कृषि क्षेत्र के विकास के लिए उन्होंने फौरी रोड मैप तैयार किया है और उस पर अमल के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश भी दिया है।

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि व इससे संबद्ध क्षेत्र के विकास के लिए सबसे जरूरी कृषि नीति है। हमारी कोशिश है कि अगले तीन माह में कृषि नीति को मूर्त रूप दे दिया जाए। इसके साथ ही राज्य की प्रमुख फसलों और सब्जियों इत्यादि के एक्सपोर्ट के लिए भी प्रयास किए जाएं। इसके लिए जरूरी है कि कृषि क्षेत्र की अपनी निर्यात नीति बने। इस दिशा में भी सरकार प्रयासरत है।

हर जिले की पहचान वहां उत्पादित होने वाले कृषि उत्पाद से होगी

कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि हमारी कोशिश है कि राज्य के प्रत्येक जिले की पहचान वहां उत्पादित होने वाले कृषि उत्पाद से हो। इससे हर जिले की अपनी एक अलग पहचान बनेगी। इसके साथ ही राज्य में जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा। प्रत्येक जिले के एक प्रखंड को जैविक ब्लॉक के रूप में विकसित किया जाएगा। जैविक प्रमाणन की व्यवस्था भी जिले में ही की जाएगी। जैविक उत्पादों को सार्टिफिकेट मिलने से किसान को उनके उत्पादों की अच्छी कीमत मिल सकेगी। हमारी कोशिश सब्जियों की कीमत का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने की है।

आने वाले कुछ दिनों में हम निश्चित रूप से इसे धरातल पर उतारेंगे। इतना ही नहीं हर प्रखंड में उद्यान प्रभाग के फार्म हाउस हैं, इन फार्म को माडल नर्सरी के तौर पर विकसित किया जाएगा। बादल ने कहा कि उन्नत बीज राज्य के भीतर ही तैयार किए जाएं ताकि बीज कंपनियों पर निर्भरता समाप्त हो। इस दिशा में भी विभाग प्रयास करेगा। हम आज भी बीज के लिए बाहर की कंपनियों पर निर्भर हैं।

पशुओं के लिए चलाई जाएगी उपकरणों से लैस एंबुलेंस

पशुपालन को भी बढ़ावा दिए जाने की बात कृषि एवं पशुपालन मंत्री ने की। कहा, 90 फीसद अनुदान पर अब तक बीपीएल परिवार की महिलाओं को गाय मुहैया कराई जाती रही है। अब सामान्य वर्ग की महिलाओं को भी 90 फीसद अनुदान पर दुधारू गाय उपलब्ध कराई जाएगी। दुग्ध उत्पादन की दिशा में एनडीडीबी ने अच्छा काम किया है। हमने एनडीडीबी से हुए एकरारनामे को विस्तार देने का निर्णय लिया है। पशु एंबुलेंस की भी व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक जिले में उपकरणों से लैस एक पशु एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएगी।

अंडा उत्पादन के क्षेत्र में भी बहुत कुछ किया जाना है। राज्य में प्रतिदिन करीब 120 लाख अंडों की की खपत है, जबकि उत्पादन 66 लाख अंडों का ही प्रतिदिन ही हो रहा है। इस अंतर को अगले चार वर्ष के भीतर पाटना है। मछली बीज उत्पादन को भी बढ़ाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। कृषि एवं पशुपालन विभाग में रिक्तियों को भी भरने की व्यवस्था की जाएगी और ऐसे पद जिनकी प्रासंगिकता खत्म हो गई है, उन्हें समाप्त किया जाएगा। इन सबके अलावा कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रमोशन, प्रोन्नति पर भी सरकार निर्णय लेगी। पेंशन से जुड़े विवादों को भी जल्द से जल्द निपटाया जाएगा।

Posted By: Alok Shahi

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