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कृषि योजनाओं में सुस्ती पर भड़के झारखंड के कृषि निदेशक, बीजों के वितरण और एफपीओ अनुदान में तेजी के निर्देश

Published: Thu, 17 Sep 2026 07:38 AM (IST)

कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की योजनाओं की समीक्षा की, जिसमें वित्तीय लक्ष्य के विरुद्ध कम उपलब्धि पर नाराजगी व्यक्त की।

झारखंड के कृषि निदेशक

झारखंड के कृषि निदेशक

HighLights

  1. कृषि निदेशक ने योजनाओं की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी।

  2. बिरसा बीज उत्पादन और एफपीओ अनुदान में तेजी लाने के निर्देश।

  3. जिला अधिकारियों को नियमित समीक्षा और समन्वय स्थापित करने को कहा।

राज्य ब्यूरो, रांची। कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने बुधवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य एवं केंद्र सरकार की ओर से प्रायोजित योजनाओं की अद्यतन स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान कई योजनाओं में वित्तीय लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि कम पाए जाने पर निदेशक ने नाराजगी जताते हुए नोडल पदाधिकारियों को कई निर्देश दिया। 

उन्होंने बिरसा बीज उत्पादन, विनिमय, वितरण योजना में जिलों को आवंटित राशि के विरुद्ध व्यय बढ़ाने के लिए जिला कृषि पदाधिकारियों से नियमित वार्ता करने को कहा है। कृषि मेला, कार्यशाला, प्रदर्शन, प्रशिक्षण योजना के तहत जून में आयोजित कृषि व्यापार मेला और खरीफ कर्मशाला के व्यय भुगतान की संचिका तथा कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा। 

जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ समीक्षा करने का निर्देश 

फसल सुरक्षा कार्यक्रम में फसल रक्षक की नियुक्ति और व्यय बढ़ाने के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र का प्रारूप तैयार करने और 18 सितंबर को जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने एफपीओ अनुदान योजना के क्रियान्वयन से संबंधित विभाग को भेजे गए पत्र का नियमित अनुसरण करने, झारखंड स्टेट मिलेट मिशन योजना में जिलों को पत्र भेजकर कार्प सर्वे में तेजी लाने, समेकित बिरसा ग्राम-सह-कृषक पाठशाला योजना की समीक्षा में उप कृषि निदेशक को संबंधित पदाधिकारियों के साथ समीक्षा कर अद्यतन प्रतिवेदन प्रस्तुत, झारखंड बीज प्रमाणन एजेंसी योजना के लिए विभाग को आवंटन निर्णय के लिए पत्र भेजने तथा निगम में प्रस्तावित नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव दो दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को कहा है।

जिलों के व्यय की स्थिति असंतोषजनक

उन्होंने समिति की योजनाओं में जिलों के व्यय की स्थिति असंतोषजनक पाए जाने पर सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजने और प्रत्येक सप्ताह जिला कृषि पदाधिकारी या परियोजना निदेशक से समीक्षा करने को कहा है। योजनाओं के क्रियान्वयन और सफल संचालन के लिए पीएमयू की आवश्यकता होने पर गठन प्रस्ताव तथा आरएफपी तैयार कर एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

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