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कैबिनेट की मंजूरी के 1 साल बाद भी जमीन पर नहीं उतरीं अकादमियां, खत्म नहीं हो रहा झारखंड के कलाकारों का इंतजार

Published: Thu, 24 Sep 2026 09:39 AM (IST)

झारखंड में साहित्य, संगीत नाटक और ललित कला अकादमियों के गठन को कैबिनेट की मंजूरी मिले एक साल से अधिक ...और पढ़ें

साहित्य, संगीत व ललित कला अकादमी का होना है गठन।

साहित्य, संगीत व ललित कला अकादमी का होना है गठन।

HighLights

  1. कैबिनेट मंजूरी के एक साल बाद भी अकादमियां नहीं बनीं।

  2. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया लंबित है।

  3. कलाकारों और साहित्यकारों में सरकार के प्रति निराशा।

संजय कृष्ण, रांची। एक साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आ सकीं अकादमियां। पिछले साल कैबिनेट से साहित्य अकादमी, संगीत नाटक अकादमी व ललित कला अकादमी के गठन की मंजूरी मिल गई थी। लेकिन अभी तक बैठक का दौर ही चल रहा है।

झारखंड बने 25 साल हो गए और साहित्य, संगीत व कला से जुड़े लोग इंतजार ही कर रहे हैं। इसके लिए झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति का गठन कर लंबे समय तक लेखकों ने इसके लिए संघर्ष किया। संघर्ष अभी जारी है।

तीनों अकादमियों में अलग-अलग अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा कोषाध्यक्ष की नियुक्ति होनी है। पिछले दस सितंबर को अर्हता निर्धारण समिति की बैठक हुई थी और इसमें आए सुझावों को लेकर एक बार तीनों क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों के साथ फिर बैठक होगी।

बैठक में मुहर लगने के बाद सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद तीनों पदों के लिए विज्ञापन निकाला जाएगा। इसके बाद ही तीनों पदों पर नियुक्ति की संभावना है। अब इसमें कितना समय लग पाएगा, कहना मुश्किल है।

हालांकि सरकार भी चाहेगी कि नवंबर में जब वह स्थापना दिवस मनाए तो यह कहने के लिए भी यह मुद्दा हो कि उसने लंबे समय से मांग की जा रही अकादमियों का गठन कर दिया। पर, क्या नवंबर तक यह संभव है?

तीनों पदों के लिए हुई थी बैठक

विभिन्न अकादमियों के पदाधिकारीगण, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष सह वित्तीय सलाहकार पद के लिए अर्हता-योग्यता के निर्धारण को लेकर बैठक हुई थी। इसमें कई पद्मश्री सम्मानित कलाकार, नाटककार, साहित्यकार आदि ने भाग लिया और अपने सुझाव दिए।

सांस्कृतिक निदेशालय के निदेशक की ओर से बैठक बुलाई गई थी। इसमें कुछ ने सुझाव दिया कि इसमें जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा को भी शामिल किया जाना चाहिए। लोगों ने अपने-अपने स्तर से सुझाव दिए हैं।

अध्यक्ष को मिलेंगे 75 हजार रुपए मानदेय

राज्य सरकार के गठित नियमावलियों के अनुसार अकादमियों में अध्यक्ष के पद पर नियुक्त होनेवाले व्यक्ति का प्रतिमाह 75 हजार रुपये मानदेय देय होगा। इसी तरह, उपाध्यक्ष को प्रतिमाह 50 हजार रुपये तथा कोषाध्यक्ष को 25 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा।

इनके अलावा इन्हें अन्य कोई भत्ता देय नहीं होगा। तीनों अकादमियों में एक-एक सचिव का भी पद होगा, जो संबंधित अकादमी का पूर्णकालिक प्रधान कार्यकारी अधिकारी होगा।

तीन साल का होगा कार्यकाल

इस पद पर उपसचिव स्तर के पदाधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। तीनों अकादमियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा कोषाध्यक्ष का कार्यकाल तीन-तीन वर्ष का होगा। हालांकि, इन्हें पहले भी पद से मुक्त किया जा सकेगा। लेकिन यह सब अभी फाइनल नहीं हुआ है। अर्हता-योग्यता को लेकर अंतिम मुहर सरकार की लगेगी और इसके बाद ही विज्ञापन निकाला जाएगा।

झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति का गठन किया

झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिरोमणि महतो का कहना है कि झारखंड के गठन हुए पच्चीस साल हो गए, लेकिन अभी तक यहां एक अदद साहित्य अकादमी का गठन नहीं हो सका। इधर प्रदेश के लेखकों ने झारखंड साहित्य अकादमी स्थापना संघर्ष समिति का गठन किया और पांच सालों से लगातार सरकार से संवाद बनाए हुए है।

समिति के अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री से मिलकर ज्ञापन भी दिया, जिसके फलस्वरूप साहित्य, संगीत और ललित कला के लिए तीन अलग-अलग अकादमियों के गठन की घोषणा हुई और साल भर पहले ही प्रारूप भी तैयार हो गए।

फिर भी अभी तक यह कार्यरूप में नहीं उतर पाया। सरकार इस पर जल्द ध्यान दे और भाषा साहित्य कला और संस्कृति के विकास के लिए जरूरी कार्य प्रारंभ करे ताकि यहां के लेखकों और कलाकारों का विश्वास और मनोबल उच्च रहे।

झारखंड कैबिनेट द्वारा अकादमी की स्थापना की स्वीकृति मिले एक वर्ष से अधिक समय बीत गया। इतना तो तय है कि सरकारी तंत्र को इन अकादमियों की स्थापना में कोई रुचि नहीं है। आश्चर्य की बात है कि इस राज्य के लेखक, कवि गायक, मूर्तिकार, चित्रकार, नर्तक आदि को राज्य सरकार की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। विडंबना कहिये कि सन 2000 में झारखंड के साथ बने राज्यों में सारी अकादमियां सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं। शायद झारखंड के माननीयों को इस बात का अंदाजा नहीं है कि अकादमियों के नहीं होने से इन लोगों की आवाज उठाने वाली कोई वैधानिक संस्था नहीं है। साहित्यकार-लेखिका महुआ माजी के सांसद होते हुए भी अकादमियों के गठन में अप्रत्याशित विलंब क्षोभ का विषय है।
-प्रमोद कुमार झा,लेखक, अनुवादक

अभी अर्हता निर्धारण समिति की बैठक हुई थी। विचार-विमर्श के बाद उसका प्रारूप बनाया जा रहा है। इसके बाद एक और बैठक होगी। विभागीय अनुमोदन के लिए भेज दिया गया है। फाइनल होने के बाद विज्ञापन निकाला जाएगा। इसके बाद अकादमियों के गठन का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द गठन हो जाए।
-आसिफ एकराम, निदेशक, सांस्कृतिक निदेशालय, झारखंड