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झारखंड में माओवाद का खात्मा: 26 साल में 682 अत्याधुनिक हथियार बरामद, पुलिस से लूटे गए थे सर्वाधिक

Published: Sat, 26 Sep 2026 05:18 PM (IST)

झारखंड में 26 वर्षों के माओवाद विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने 682 अत्याधुनिक हथियार बरामद किए हैं, जिनमें अधिकांश ...और पढ़ें

बरामद हथियारों में 93 एके-47, दस एलएमजी, 111 इंसास, 123 एसएलआर, 28 कार्बाइन शामिल।

बरामद हथियारों में 93 एके-47, दस एलएमजी, 111 इंसास, 123 एसएलआर, 28 कार्बाइन शामिल।

HighLights

  1. झारखंड में 26 साल में 682 हथियार बरामद।

  2. बरामद हथियारों में 93 एके-47, 111 इंसास शामिल।

  3. बरामद हुए अधिकांश हथियार पुलिस से लूटे गए थे।

दिलीप कुमार, रांची। झारखंड से माओवादियों का खात्मा हो चुका है। अलग राज्य बनने के बाद से अब तक माओवाद की समस्या से जूझ रहे झारखंड ने अब राहत की सांस ली है। इस माओवाद विरोधी अभियान को अंजाम तक पहुंचाने में झारखंड पुलिस व केंद्रीय बलों के 600 से अधिक जवान व अधिकारी बलिदान हो चुके हैं।

सैकड़ों माओवादी भी मारे गए और भारी संख्या में आत्मसमर्पण व गिरफ्तारियां भी हुईं। इस 26 साल के सफर में माओवादियों के पास से सुरक्षा बलों ने 682 अत्याधुनिक हथियारों की भी बरामदगी की। इनमें सर्वाधिक हथियार पुलिस से ही लूटे हुए हैं।

बरामद हथियार इतने हैं, जितने में आधा से अधिक बटालियन के जवानों को हथियार की आपूर्ति की जा सकेगी। एक बटालियन में 10 कंपनियां होती हैं। प्रत्येक कंपनी में 80 से 100 जवान-अधिकारी होते हैं।

झारखंड पुलिस के आंकड़े के अनुसार वर्ष 2000 से 2004 तक एक भी हथियार की बरामदगी नहीं है। वहीं वर्ष 2005 से अगस्त 2026 तक कुल 682 हथियार बरामद हुए हैं।

इन हथियारों में 93 एके-47, दस एलएमजी, 111 इंसास, 123 एसएलआर, 28 कार्बाइन व 247 .303 राइफलें शामिल हैं। इसके अलावा माओवादियों के पास से अन्य बरामद हथियारों की संख्या 70 हैं। इस बरामदगी के बावजूद पुलिस चुप नहीं बैठी है।

गिरफ्तार या आत्मसमर्पण के बाद जेल भेजे गए माओवादियों से पुलिस यह जानकारी जुटाने की कोशिश में है कि उनके बचे हुए हथियार, गोला, बारूद आदि कहां छुपाकर रखे गए हैं, ताकि उन हथियारों की भी बरामदगी की जा सके। एके-47, इंसास, एलएमजी, एसएलआर कार्बाइन आदि हथियार माओवादियों को मजबूत स्थिति रखे।

आपूर्ति चेन तोड़ी, राशन रोकी, तब जाकर काबू में आए माओवादी

माओवादियों के विरुद्ध अब तक हुई कारगर कार्रवाई के पीछे केंद्र व राज्य सरकारों का सुरक्षा बलों को खुला समर्थन देना था। सुरक्षा बलों ने भी जान की परवाह किए बगैर माओवादियों के हथियार, गोला बारूद की आपूर्ति करने वाले सिंडिकेट व चेन को तोड़ दिया।

जब माओवादियों ने यह मान लिया कि अब उनकी राह आसान नहीं है, तब वे एक-एक कर पुलिस के सामने अपना हथियार डालते चले गए। कहीं गिरफ्तारियां हुईं तो कहीं राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति तथा आपरेशन नव जीवन से प्रेरित होकर माओवादी समाज की मुख्य धारा से जुड़ गए।

किस वर्ष कितने हथियार की बरामदगी

वर्ष एके-47 इंसास एलएमजी कार्बाइन 0.303 एसएलआर अन्य कुल
2005 0 0 0 1 2 2 0 5
2006 0 3 0 0 0 0 0 3
2007 1 0 0 1 26 10 5 43
2008 1 1 0 6 25 7 3 43
2009 1 3 0 1 4 2 1 12
2010 3 9 1 1 21 3 3 41
2011 0 0 0 1 9 2 3 15
2012 2 0 0 1 8 0 1 12
2013 2 2 0 0 4 2 0 10
2014 5 1 0 3 13 3 1 26
2015 1 1 0 1 1 4 1 9
2016 1 0 0 0 0 2 0 3
2017 4 13 2 0 10 7 4 40
2018 9 6 0 1 18 6 5 45
2019 7 4 1 0 1 3 0 16
2020 10 7 1 7 12 5 2 44
2021 3 7 0 0 11 4 4 29
2022 5 12 2 2 24 14 0 59
2023 5 6 1 1 4 4 5 26
2024 6 3 1 0 14 7 2 33
2025 12 16 0 0 23 20 12 83
2026 15 17 1 1 17 16 18 85
कुल 93 111 10 28 247 123 70 682

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