यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 13, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
झारखंड में जबरन धर्मांतरण पर जेल और जुर्माना
किसी भी व्यक्ति को बलपूर्वक या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। विपक्ष के भारी विरोध के बीच शनिवार को विधानसभा में लोगों के जबरन धर्मातरण पर रोक लगाने वाला झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक, 2017 पास हो गया। वहीं, झामुमो विधायकों के हंगामे व उनके द्वारा सदन के बहिष्कार के बीच भूमि अर्जन संशोधन विधेयक, 2017 भी पास हुआ। दोनों विधेयक ध्वनिमत से पारित हुए। विपक्ष ने जहां धर्म स्वतंत्र विधेयक लाने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, वहीं भू अर्जन संशोधन विधेयक को सीएनटी-एसपीटी में संशोधन को वापस लेने पर इसे बैकडोर से फिर से लाने का प्रयास बताया।
झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक, 2017 के तहत झारखंड में अब किसी भी व्यक्ति को बलपूर्वक अथवा प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा। ऐसे मामलों में तीन वर्षो तक का कारावास तथा 50 हजार रुपये का जुर्माना हो सकेगा। अगर धर्म परिवर्तन किसी नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का किया गया हो तो चार वर्षो का कारावास तथा एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की इच्छा रखता है तो उसे उपायुक्त से सहमति लेनी होगी।
ऐसा नहीं करने पर उसे एक वर्ष तक का कारावास या पांच हजार रुपये का जुर्माना अथवा दोनों सजा हो सकती है। ऐसे मामलों के अभियोजन पदाधिकारी उपायुक्त अथवा उपायुक्त के स्तर से नामित अनुमंडल पदाधिकारी स्तर के पदाधिकारी होंगे। इससे इतर ऐसे मामलों के अनुसंधान पदाधिकारी पुलिस निरीक्षक स्तर के होंगे।
वहीं, भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार संशोधन विधेयक, 2017 के तहत जहां विकास योजनाओं के सामाजिक प्रभावों के मूल्यांकन की बाध्यता खत्म हो जाएगी, वहीं कुछ खास उद्देश्यों से ही जमीन का अधिग्रहण हो सकेगा। भू-अधिग्रहण की सारी प्रक्रिया ग्रामसभा के माध्यम से संचालित होगी।
प्रवर समिति को सौंपने का प्रस्ताव खारिज
विपक्ष के विधायकों ने दोनों विधेयकों को प्रवर समिति को सौंपने का प्रस्ताव दिया था, जो स्वीकृत नहीं हुआ। झामुमो के स्टीफन मरांडी ने झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने का प्रस्ताव दिया था। वहीं विपक्ष के 14 विधायकों ने भूमि अर्जन संशोधन विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने का प्रस्ताव दिया था।
भूमि अर्जन संशोधन विधेयक में आगे क्या
इस संशोधन प्रस्ताव को अब राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की सहमति से राष्ट्रपति को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि गुजरात, गोवा, तेलंगाना आदि राज्यों ने वहां की जरूरतों के हिसाब से इन कानून में संशोधन किया है।
इनके लिए सरकार अधिग्रहित कर सकेगी भूमि
भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के बाद सिर्फ विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, अस्पताल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, रेल, सड़क, जलमार्ग, विद्युतीकरण, सिंचाई, जलापूर्ति पाइपलाइन, टांसमिशन लाइन तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के लिए बनाई जानेवाली आवासीय इकाइयों के निर्माण के लिए सरकार जमीन का अधिग्रहण कर सकेगी।
धर्म स्वतंत्र विधेयक के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा
धर्म स्वतंत्र विधेयक के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सारे विधायक और वरीय पदाधिकारी रविवार को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन दिया। जेएमएम ने अल्पसंख्यकों को आतंकित करने और राज्य का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाय है।
