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देश के लिए जीते 4 स्वर्ण पदक, आज पेट पालने के लिए रांची की सड़कों पर कैब चला रहा खिलाड़ी

By Diwaker SinghEdited By: Mansi Kumari
Published: Sun, 28 Jun 2026 02:19 PM (IST)

अंतरराष्ट्रीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार ने भारत के लिए 4 स्वर्ण पदक जीते हैं, लेकिन आज वह रांची में परिवार ...और पढ़ें

अमरदीप की संघर्ष भरी कहानी। एआई जेनरेटेड इमेज

अमरदीप की संघर्ष भरी कहानी। एआई जेनरेटेड इमेज

HighLights

  1. अंतरराष्ट्रीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार ने भारत के लिए 4 स्वर्ण पदक जीते।

  2. पदक जीतने के बावजूद, परिवार चलाने के लिए रांची में कैब चला रहे।

जागरण संवाददाता, रांची। जब भी कोई खिलाड़ी देश के लिए पदक जीतता है, पूरा देश उसकी जीत का जश्न मनाता है लेकिन क्या होता है जब वही खिलाड़ी कुछ साल बाद रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर कैब चलाने को मजबूर हो जाए? यह सवाल सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं बल्कि उस व्यवस्था का भी है जो तालियां तो बजाती है लेकिन मुश्किल वक्त में अपने चैंपियनों को अकेला छोड़ देती है।

रांची के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार की कहानी कुछ ऐसी ही है। जिस खिलाड़ी ने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर चार स्वर्ण पदक जीते, आज वही खिलाड़ी परिवार का पेट पालने के लिए दिनभर कैब चलाता है। इतना ही नहीं, खाली समय में वह अरगोड़ा चौक स्थित अपने पिता की सब्जी दुकान पर भी हाथ बंटाता है।

देश का नाम रोशन किया लेकिन अपनी जिंदगी की लड़ाई हार रहे है

अमरदीप बताते है कि उन्होंने देश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीते है। हाल ही में रांची में आयोजित दूसरी साउथ एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप में उन्होंने एक बार फिर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

इससे पहले 2019 बेंगलुरु में आयोजित सैफ चैंपियनशिप और मलेशिया में जूनियर एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी भारत को स्वर्ण पदक दिलाया, लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति नहीं बदली। उन्हें राज्य सरकार से न स्थायी रोजगार मिला, न आर्थिक सहायता और न ही वह सम्मान, जिसकी उम्मीद एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को होती है।

कई बार गुहार लगाई लेकिन कोई नहीं सुनता

अमरदीप कहते है कि उन्होंने कई बार खेल विभाग को आवेदन देकर मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। अमरदीप की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों खिलाड़ियों की हकीकत ही, जो देश के लिए मेजल तो जीतते है लेकिन बाद में रोजगार और सम्मान के लिए संघर्ष करते रहते है।