झारखंड समेत देशभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ी पहल, आपदा से बचाव के लिए बनेगा राष्ट्रीय ढांचा
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने स्कूलों में आपदा से बचाव के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने का प्रस्ताव ...और पढ़ें

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HighLights
स्कूलों में आपदा से बचाव का राष्ट्रीय ढांचा बनेगा।
पूर्व चेतावनी, सुरक्षित निकासी, सीपीआर प्रशिक्षण पर जोर।
अनुज तिवारी, रांची। झारखंड सहित विभिन्न राज्यों के स्कूलों में आपदा से बचाव और आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक समान राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की पहल हुई है। इसके तहत पूर्व चेतावनी, बच्चों की सुरक्षित निकासी, आपदा प्रबंधन टीम के गठन, सीपीआर व जीवनरक्षक प्रशिक्षण तथा नियमित माक ड्रिल पर जोर दिया गया है।
इसका उद्देश्य आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर विद्यार्थियों की जान बचाना है। रांची के सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति शर्मा ने इस संबंध में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से सरकारी, निजी और अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम आपदा सुरक्षा एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया ढांचा बनाने की मांग की थी। उन्होंने 31 अगस्त को ईमेल के माध्यम से प्रस्ताव भेजा था।
इस पर एनडीएमए के अवर सचिव एसके शर्मा ने 25 सितंबर को पत्र जारी कर बताया कि सुझावों को संज्ञान में लिया गया है और उचित कार्रवाई के लिए शिक्षा मंत्रालय को भेजा गया है।
नेपाल की घटना से मिली सीख
प्रस्ताव में नेपाल में बाढ़ के दौरान समय पर कार्रवाई से करीब 1600 विद्यार्थियों की जान बचने की घटना का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि समय पर चेतावनी, स्पष्ट निकासी योजना और प्रशिक्षित कर्मियों की मौजूदगी बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभा सकती है।
भारत में बाढ़, भूकंप, आकाशीय बिजली, चक्रवात और आग जैसी आपदाओं के खतरे को देखते हुए स्कूलों में सुरक्षा की पुख्ता तैयारी जरूरी है।
हर स्कूल में बनेगी आपदा प्रबंधन योजना
प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में स्थानीय जोखिमों के आधार पर आपदा प्रबंधन और सुरक्षित निकासी की योजना तैयार करने की जरूरत है। बाढ़, भूकंप, आग और खराब मौसम जैसी परिस्थितियों के लिए अलग-अलग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित होनी चाहिए। जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से स्कूलों तक चेतावनी पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है।
आपात स्थिति में निकासी का निर्णय कौन लेगा, बच्चों को किस रास्ते से बाहर निकाला जाएगा और उन्हें कहां एकत्रित किया जाएगा, यह पहले से तय होना चाहिए। प्रत्येक स्कूल में जिम्मेदारियों के स्पष्ट बंटवारे के साथ आपदा प्रबंधन टीम गठित करने की भी बात है।
सीपीआर प्रशिक्षण और माक ड्रिल पर जोर
प्रस्ताव में शिक्षकों व संबंधित कर्मचारियों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) और बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) का प्रशिक्षण देने की भी बात कही गई है। इससे हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता मिलने तक शुरुआती जीवनरक्षक मदद मिल सकेगी।
नियमित माक ड्रिल से कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने और आपदा के समय घबराहट के बजाय व्यवस्थित तरीके से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
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