राज्य ब्यूरो, रांची। 2014 से 2017 के बीच झारखंड में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न के 1818 मामले दर्ज किए गए। ये सभी मामले पोक्सो एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन अगेंस्ट सेक्सुअल ऑफेंसेज) के तहत दर्ज कराए गए हैं। राज्य में नाबालिगों के साथ बढ़ते यौन उत्पीड़न की यह बानगी भर है।

इस क्षेत्र में काम कर रही संस्था यूनिसेफ की मानें तो यौन हिंसा से जूझ रहीं लाखों लड़कियों और महिलाओं में से अधिकतर डर, सामाजिक कलंक अथवा संसाधनों की कमी के कारण अपनी बातें सक्षम प्राधिकार नहीं पहुंचा पाती। यह बात भले ही चौकाने वाली लगे, परंतु यह सच्चाई है कि देश में एक फीसद से भी कम पीड़िताओं को ही पेशेवर सहायता मिल रही है। यूनिसेफ ने इस स्थिति को बदलने के लिए एक मॉडल स्पेशल कोर्ट, एक स्वास्थ्य परीक्षण केंद्र बनाने की वकालत की है।

महिलाओं के खिलाफ हिंसा

यूनिसेफ की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ हिंसा में 100 फीसद की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि खासतौर पर जघन्य अपराध के मामले में दर्ज की गई है।

झारखंड में महिलाओं की स्थिति

लैंगिक अनुपात

शिशु लिंगानुपात (छह साल तक की आयु) की बात करें तो पहले जहां 1000 लड़कों पर 965 लड़कियां थी, वह अब घटकर 919 हो गई है।1साक्षरता 12001 में जहां राज्य की औसतन 39 फीसद महिलाएं साक्षर थीं, वहीं 2015 में यह फीसद बढ़कर 59.9 हो गया। ग्रामीण इलाकों में यह दर 55.2, जबकि शहरी क्षेत्रों में 77.5 फीसद है।

बाल विवाह

राज्य में बाल विवाह की दर में गिरावट आई है, लेकिन इसकी गति अपेक्षाकृत धीमी है। 2005-06 में इसका फीसद 63 था, जो 2007-08 में 56 पर पहुंच गया। 2015-16 में बाल विवाह का फीसद 38 रहा।ॉ

कुपोषण

कुपोषण के सभी घटकों (कम वजन, नाटापन, सूखापन) में सुधार हुआ है। कम वजन के मामले में जहां 8.7 फीसद की गिरावट दर्ज की गई, वहीं नाटापन में 4.5 गिरावट की बात सामने आई है।

नारी शिक्षा

पहली से आठवीं कक्षा तक में लगभग सभी लड़कियों का नामांकन होता है। माध्यमिक स्तर पर यह औसत महज 51.32 फीसद है।

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Posted By: Sachin Mishra

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