जागरण संवाददाता, रांची :

राज्य के 19 जिलों के हजारों गांवों को पानी के लिए आत्मनिर्भर करने के लिए स्वजल योजना की शुरुआत की गई। गांवों में लगने वाले वाटर स्टेशनों का संचालन व देखरेख गांववालों की जिम्मेवारी होगी। प्रोजेक्ट के लिए जिलों का चयन नीति आयोग ने किया है। इस योजना के तहत सभी जिले के गावों में स्वजल योजना के क्रियान्वयन के लिए अभियंताओं और मुखिया को प्रशिक्षण दिया जाना है जिसके लिए मंगलवार को पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला की शुरुआत हुई।

कार्यशाला के उद्घाटन के मौके पर पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चंद्र प्रकाश चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होने दीप जला कर कार्यक्रम की शुरुआत की। साथ में विभागीय सचिव आराधना पटनायक, यूनिसेफ राज्य प्रमुख मधुलिका जोनाथन, यूनिसेफ के जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ कुमार प्रेमचंद, पेयजल विभाग के मुख्य अभियंता श्वेताभ कुमार और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के उप-सलाहकार मुरलीधरण मौजूद थे।

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री ने अपने संबोधन में जल प्रबंधन, जल सरंक्षण और वर्षा जल संग्रहण के बारे में कहा। उन्होने योजना के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा करते इसके सफल क्रियान्वयन हेतु अभियंताओं को तत्परता के काम करने का निर्देश दिया। पांच दिनों तक चलने वाले कार्यशाला में जिलों के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, मुखिया और जिला समन्वयकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सभी प्रतिभागियों को स्वजल योजना, इसके उद्देश्यों और कार्यान्वयन के तकनीकों से अवगत कराया गया। -----

महिलाओं को मिलेगी ताकत, पानी के लिए नहीं जाना होगा दूर -

कार्यशाला के उद्घाटन के मौके पर सचिव आराधना पटनायक ने स्वजल योजना को अन्य योजनाओं से भिन्न बताया। उन्होने कहा कि स्वजल योजना के तहत बनने वाले वाटर स्टेशन भले ही सरकार प्रदत्त हो, लेकिन इसका स्वामित्व गांव वालों के हाथ में होगा। उन्होने योजना के मरम्मत आदि कार्यो में दक्ष बनाने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण देने की बात कही।

यूनिसेफ राज्य प्रमुख मधुलिका जोनाथन ने ग्रामीण महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि दूर जा कर पानी लाने के लिए मजबूर महिलाओं को अब घरों में ही शुद्ध पेयजल मिल सकेगा। कई बार स्कूल के बच्चों को भी पानी लाने के कारण स्कूल आने में देरी हो जाती थी जो कि अब नहीं होगा। 20 से 25 परिवार पर होगा एक वाटर सिस्टम

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मुख्य अभियंता श्वेताभ कुमार ने जानकारी दी कि जिले के जिन प्रतिनिधियों को यहां प्रशिक्षण मिल रहा है, वे जा कर अपने गावों में अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस प्रकार हर गांव में दर्जन भर लोग प्रशिक्षित किए जाएंगे जो कि वाटर सिस्टम को संचालित करेंगे। उन्होने बताया कि 19 में से 10 जिलों यूनिसेफ और चार जिलों में टाटा ट्रस्ट प्रशिक्षण देने का काम करेगी। अन्य अन्य पांच जिलों में प्रशिक्षण के लिए एनजीओ की मदद ली जाएगी। हर वाटर स्टेशन की लागत छह लाख होगी और एक वाटर स्टेशन से गांव के 20 से 25 परिवारों को पानी मिल सकेगा।

Posted By: Jagran