रांची, संजय कुमार :

आरएसएस के अनुषांगिक संगठन एकल अभियान को वर्ष 2017 के गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 26 फरवरी को राष्ट्रपति भवन में यह सम्मान एकल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बजरंग लाल बागड़ा ग्रहण करेंगे। देश की प्रमुख कंपनी नाल्को के सीएमडी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद अपना पूरा समय एकल के लिए दे रहे बागड़ा एकल आरोग्य फाउंडेशन के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने के लिए रांची आए हुए हैं। अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकालकर उन्होंने दैनिक जागरण के संवाददाता से एकल से संबंधित विषयों पर खुलकर बातचीत की। कहा, भारत-पाक सीमावर्ती गांवों में जहां एकल का काम चल रहा है वहां पत्थरबाजी नहीं होती है। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश। -एकल अभियान को गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसे आप किस रूप में लेते हैं?

उत्तर- इस सम्मान से पूरा एकल परिवार खुश है। समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार ने एकल के तीन दशकों की समर्पण एवं सेवा का सम्मान किया है। इस सम्मान से आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, संस्कार एवं विकास के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ने के साथ-साथ प्रोत्साहन मिला है। अपनी गतिविधियां बढ़ाने में इस सम्मान से काफी प्रेरणा मिलेगी। एकल के कार्यो से समाज में क्या बदलाव दिख रहा है?

उत्तर-एकल अभियान के पंचमुखी शिक्षा का काफी प्रभाव पड़ा है। जिन गांवों में स्कूल चल रहे हैं वहां के बालकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है। बच्चों को आगे पढ़कर कुछ करने की प्रेरणा मिलती है। एकल के छात्रों में ड्रापआउट नहीं के बराबर है। संस्कार शिक्षा के प्रभाव से गांव से नशा मुक्ति एवं सामाजिक समरसता के भाव देखने को मिल रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम में सहायता मिली है। स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है। कौशल विकास की शिक्षा से गांवों में भी रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं। नगर की ओर पलायन में कमी आई है। प्रश्न - जम्मू-कश्मीर में भी एकल विद्यालय हैं। वहां काम कैसे करते हैं और समाज पर क्या प्रभाव पड़ा है?

उत्तर- जम्मू-कश्मीर के 4000 गांवों में एकल का काम चल रहा है। इनमें से 310 गांव कश्मीर घाटी के हैं। भारत-पाक सीमा पर बसे ये वैसे गांव हैं जहां ¨हदू आबादी के पलायन के बाद शत-प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या है, वहां एकल के सभी छात्र, आचार्य, प्रशिक्षक एवं समिति के लोग मुस्लिम समुदाय के हैं। एकल के प्रयास से वहां शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीयता की भावना स्थापित करने में महती सफलता मिली है। भारत के प्रति समर्पित मुस्लिम बंधुओं के सहयोग से गांव में काम मजबूती से चल रहे हैं। जिन गांवों में एकल का काम चलता है वहां पत्थरबाजी नहीं होती है। नियंत्रण रेखा पर बसे गांव में एकल का काम बढ़ा है। नियंत्रण रेखा पर तनाव की स्थिति में जब गांव को पुनस्र्थापित किया जाता है तब एकल के विद्यालय दो दिनों में काम फिर से शुरू कर देते हैं। इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होती है। प्रश्न -काम के दौरान आतंकवादियों से कभी परेशानी तो नहीं होती है?

उत्तर : सीमा पर काम करने के दौरान कभी-कभी टकराव की स्थिति बनती है, परंतु स्थानीय लोग होने के कारण समस्याओं का निपटारा अपने स्तर पर कर लेते हैं। भारत के प्रति सम्मान एवं श्रद्धा रखने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। अलगाववादियों का समर्थन करने वाले नगण्य लोग हैं। वहां 95 प्रतिशत भारत समर्थक हैं। पांच प्रतिशत ही अलगाववादी हैं, परंतु वे गलत करते हैं इस कारण उन्हीं के कारनामे देश के सामने ज्यादा आते हैं।

प्रश्न- एकल अभियान का आगे लक्ष्य क्या है?

इस वर्ष के अंत तक 83हजार गांव से बढ़कर एक लाख गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य है। आने वाले चार वर्षो में आरोग्य, संस्कार एवं विकास के सारे कार्यक्रम इन गांवों में चलने लगेंगे।

प्रश्न- इतने बड़े कार्यक्रम के लिए धन कहां से आता है। कितने कार्यकर्ता हैं और वर्ष भर कितना खर्च होता है?

उत्तर - एकल का सारा काम समाज के सहयोग से चलता है। सरकार से कोई मदद नहीं लेते हैं। अभी वर्ष भर में 180 करोड़ रुपये का खर्च आता है। इनमें से दो तिहाई भारत से एवं एक तिहाई राशि विदेश में बसे भारतीयों से मिलता है। भारत के 25 राज्यों एवं विदेश के 13 देशों में एकल का काम चल रहा है। 8900 पूर्ण कालिक कार्यकर्ता एवं 84000 अंशकालिक आचार्य हैं, जिनको मानदेय के रूप में कुछ राशि दी जाती है। इसके साथ ही 2.50 लाख अंशकालिक कार्यकर्ता हैं जो बिना कुछ लिए, जरूरत पड़ने पर अपना खर्च कर संगठन को सहयोग करते हैं। आज गांवों में काम करने वाले विश्व के सबसे बड़े गैर सरकारी संगठनों में एकल अभियान है। सेवा भाव से काम करने वाले कार्यकर्ताओं के कारण एकल अभियान का प्रशासनिक व्यय पूरे विश्व में सबसे कम है।

Posted By: Jagran

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