रांची, राज्य ब्यूरो। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के मुलायम यादव से मिलने पर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। फिलहाल यह संभावना जताई जा रही है कि इसको देखते हुए सीबीआइ लालू की जमानत रद कराने के लिए आवेदन दे सकती है। अगर ऐसा हुआ तो क्या झारखंड हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर लालू यादव एक बार फिर झारखंड की जेल में हो सकते हैं, लोगों के मन में ये सवाल उठने लगे हैं। लेकिन सुशील मोदी के ट्वीट में कितनी सच्चाई है और क्या लालू जेल जा सकते हैं?

दरअसल, सुशील मोदी ने सोमवार को ट्वीट कर कहा कि लालू प्रसाद का यूपी में न कोई जनाधार है, न कभी वहां उनकी पार्टी के दो-चार उम्मीदवार विधायक बन पाए, लेकिन वे मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव से मिलकर केवल मीडिया में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। चारा घोटाला के चार मामलों में सजायाफ्ता लालू प्रसाद को गंभीर बीमारियों की वजह से स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मिली है, लेकिन वे राजनीतिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं। सीबीआइ को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। उन्‍होंने यह भी कहा कि चारा घोटाला के पांचवें मामले में रांची कोर्ट का फैसला जल्‍द आने वाला है।

जबकि लालू यादव के अधिवक्ता प्रभात कुमार की मानें तो लालू प्रसाद यादव को जमानत देने के दौरान कोर्ट ने कोई ऐसी शर्त नहीं लगाई थी कि वे किसी राजनीतिक व्यक्तियों से नहीं मिलेंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव उनके समधी हैं और उनके बीमार होने की सूचना पर लालू प्रसाद यादव उनसे मिलने गए थे। इसमें कोई राजनीति नहीं है। उन्होंने बताया कि सजा की आधी अवधि जेल में पूरी करने पर ही झारखंड हाई कोर्ट से लालू यादव को जमानत मिली है। यह कोर्ट का पूर्व में निर्धारित नियम के तहत हुआ है। इसमें लालू प्रसाद को किसी बीमारी के आधार पर जमानत नहीं मिली है। हालांकि उनके इलाज के लिए राज्य स्तर से एम्स भेजा गया था। जहां उनका इलाज चल रहा है। जमानत को रद कराने के लिए सीबीआई की याचिका दाखिल करने के सवाल पर लालू के अधिवक्ता देवर्षि मंडल ने कहा कि सीबीआई को ऐसा करने का अधिकार है।

किसी को याचिका दाखिल करने से रोका नहीं जा सकता है। लेकिन सीबीआई की ओर से हाल फिलहाल में अभी तक कोई याचिका दाखिल नहीं की गई है। इससे पहले सीबीआई ने देवघर मामले में लालू को मिली जमानत के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जहां पर याचिका अभी भी लंबित है। बता दें कि लालू प्रसाद यादव को पांच में चार मामलों में सजा मिल चुकी है। सभी चार मामलों लालू प्रसाद यादव को हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। इस बार जेल से निकलने में उन्हें करीब ढाई साल लग गए थे।

वहीं, डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी का मामले में अभी निचली अदालत में सुनवाई चल रही है। फिलहाल इस मामले में ऑनलाइन सीबीआइ की ओर से बहस की जा रही है। कई बचाव पक्षों का कहना है कि फिजिकल सुनवाई के दौरान ही वे अपना पक्ष रखेंगे। संभावना है कि लालू प्रसाद की ओर से ऐसा आवेदन कोर्ट में दिया जा सकता है, क्योंकि इस मामले में साक्ष्य के रूप में कई हजार दस्तावेज हैं, जिन्हें कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। यह कार्य फिजिकल कोर्ट शुरू होने पर ही संभव है।

Edited By: Vikram Giri