रांची, अमन मिश्रा। दिल्ली में रविवार को हुए भीषण अग्निकांड में कई लोगों की जिंदगी बचाने वाले फायर ब्रिगेड के अधिकारी रांची निवासी राजेश शुक्ला बचपन से ही बहादुर रहे हैं। पढ़ाई में भी वे हमेशा से अव्वल थे। बचपन में भी दूसरों की मदद करते रहते थे। उनके पिता ब्रजकिशोर शुक्ला ने दैनिक जागरण से बात करते हुए उनकी बहादुरी और दिलेरी के कई किस्से सुनाए। दो भाइयों और एक बहन वाले परिवार में राजेश सबसे छोटे हैं। पिता दोनों भाइयों को एमबीबीएस कराकर डॉक्टर बनाना चाहते थे। इसके लिए बड़े भाई राकेश शुक्ला के साथ राजेश को पटना भेजा गया था। लेकिन, उन्हें मेडिकल की लंबी पढ़ाई पसंद नहीं थी। इसलिए बीच में ही तैयारी छोड़कर वापस रांची लौट आए।

रांची आने के बाद बुंडू के पीपीके कॉलेज से अंग्रेजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद नागपुर में फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग की। इसके बाद इन्हें दिल्ली सरकार में सबऑर्डिनेट सर्विस की नौकरी मिल गई।  लेकिन राजेश इतने से कहां संतुष्ट होने वाले थे। उन्हें तो जोखिम में जान डाल लोगों की जान बचाने का जुनून था। इसी पैशन को लेकर सबऑर्डिनेट की नौकरी छोड़ दी। 2005 में फायर सर्विस ज्वाइन किया। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई बिशप वेस्टकॉट ब्वॉयज स्कूल नामकुम से पूरी की है। राजेश पत्नी व दो बेटियां के साथ अभी दिल्ली में ही रहते हैं।

राजेश शुक्ला के बड़े भाई और बिहार के सासाराम के सरकारी स्कूल में शिक्षक राकेश शुक्ला ने बताया कि राजेश फायरमैन की जिंदगी से जुड़ी कहानियां हमेशा सुनाते रहते हैं। राजेश का मानना है कि फायर वाली जगह पर पहले अफसर को ही जाना चाहिए, इसके बाद अपने फायरमैन को बुलाना चाहिए। राकेश बताते हैं कि बचपन में टीवी पर उस समय का बहुचर्चित सीरियल फौजी आता था, तो राजेश हमेशा कहते थे कि हमें भी ऐसा ही कुछ बनना है।

राजेश शुक्ला की मां सेवानिवृत्त शिक्षिका आनंदी देवी को बेटे की उपलब्धि पर गर्व है। लेकिन, मां की ममता कई बार इस तरह के जोखिम से घबराती भी है। राजेश हमेशा मां से कहते हैं, चिंता करने की कोई बात नहीं है। आनंदी देवी ने बताया कि राजेश रोज रात में बात कर दिनभर की गतिविधियां जरूर बताते हैं।

सेना में भी रहे हैं पिता

राजेश शुक्ला के पिता ब्रजकिशोर शुक्ला पहले सेना में थे। वहां साढ़े छह साल की नौकरी करने के बाद उन्होंने रांची स्थित सीएमपीडीआइ (सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट) ज्वाइन किया। जनवरी 2015 में वे सीएमपीडीआइ से असिस्टेंट सिक्योरिटी सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए। मां आनंदी देवी बुनियादी विद्यालय नामकुम से 2016 में सेवानिवृत्त हुई हैं। माता-पिता अपनी बेटी अनु और दामाद सुनील ओझा के साथ नामकुम के तेतरी टोला में रहते हैं।

 

Posted By: Alok Shahi

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