झारखंड CM हेमंत सोरेन की 'महंगी जैकेट' पर सियासी रार: BJP ने कसा तंज, JMM बोली- यह पिछड़ी सोच और झूठ का पुलिंदा
Jharkhand में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दावोस यात्रा के दौरान पहनी गई जैकेट पर सियासी घमासान छिड़ गया है। भाजपा ...और पढ़ें

जेएमएम नेता अमितेश सहाय इस तस्वीर को शेयर कर लिखते हैं- दावोस से निवेश लाने के लिए सीएम को ऐसे देखना गर्व की बात है।

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड की सियासत में इन दिनों जैकेट को लेकर घमासान मचा हुआ है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 के दावोस सम्मेलन में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की एक तस्वीर ने राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
भाजपा ने मुख्यमंत्री पर लाखों की जैकेट पहनने का आरोप लगाते हुए इसे 'गरीब जनता के साथ धोखा बताया है, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसे भाजपा की जातिवादी मानसिकता और हताशा करार दिया है।
राज्य की राजनीति में एक बार फिर तल्खी बढ़ गई है। भाजपा की झारखंड इकाई ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्हें विदेशी यात्रा के दौरान कथित तौर पर 2.76 लाख रुपये की लग्जरी कोट पहनने का आरोप लगाया गया।
पोस्ट में कहा गया कि राज्य की जनता गरीबी से जूझ रही है, लेकिन CM 'इनवेस्टर्स ट्रिप' के नाम पर महंगे कपड़ों में घूम रहे हैं। यह पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद पक्ष और विपक्ष से प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है।
विवाद की जड़: क्या है वो जैकेट?
भाजपा झारखंड (@BJP4Jharkhand) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एफबी और एक्स पर एक ग्राफिक साझा किया, जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा पहनी गई जैकेट को लग्जरी ब्रांड Burberry का 'चेल्सी हेरिटेज ट्रेंच कोट' बताया गया है। भाजपा का दावा है कि इस कोट की कीमत लगभग $3,040 (करीब 2.76 लाख रुपये) है।
भाजपा ने तंज कसते हुए लिखा, "कमाल करते हैं हेमंत जी, झारखंड की जनता गरीबी और विवशता की जिंदगी जीने को मजबूर है और आप इनवेस्टर्स ट्रिप के नाम पर विदेश में लाखों की कोट पहनकर घूम रहे हैं।" विपक्ष ने इसे मुख्यमंत्री की 'हाइपोक्रिसी' बताते हुए सवाल उठाया कि एक गरीब राज्य का मुखिया इतनी महंगी जीवनशैली कैसे अपना सकता है।

बीजीपी झारखंड के इसी पोस्ट पर विवाद। (तस्वीर- इंटरनेट मीडिया)
JMM का पलटवार: 'आदिवासी नेता की प्रगति से चिढ़ रही BJP'
जेएमएम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे झूठी अफवाह बताया है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल सरंगी ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि भाजपा एक आदिवासी राजनेता को वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ देखकर बौखला गई है।
उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री ने जो जैकेट पहनी है, उसका असली ब्रांड भी इन्हें नहीं पता, बस अफवाह फैलाकर निवेश के बड़े मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहते हैं।
जेएमएम नेता अमितेश सहाय लिखते हैं- सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व विधायक कल्पना सोरेन के दावोस ब्रांडेड ओवरकोट पर निंदा? बेहद शर्मनाक वर्णवादी कुंठा है।
माइनस सात डिग्री ठंड में गर्म कोट पहनना अपराध? केंद्रीय नेताओं के लाखों के ब्रांडेड सूट-घड़ियों पर चुप्पी क्यों? नीतिगत आलोचना करो, कपड़ों पर नहीं! क्या आदिवासी नेताओं को अच्छे कपड़े पहनने का हक नहीं है?
पार्टी समर्थकों का इंटरनेट मीडिया पर तर्क
ऐसी दिखने वाली जैकेट बाजार में $100 से भी उपलब्ध हैं।
- जब देश के मुखिया महंगे सूट पहन सकते हैं, तो एक मुख्यमंत्री के पहनावे पर सवाल उठाना उनकी 'आदिवासी विरोधी' और 'जातिवादी' सोच को दर्शाता है।
- मुख्यमंत्री दावोस में राज्य के लिए 11,100 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव (MoU) पर चर्चा कर रहे हैं, जिसे दबाने के लिए भाजपा कपड़ों पर राजनीति कर रही है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
यह मुद्दा इंटरनेट पर दो धड़ों में बंट गया है।
- विपक्षी खेमा: कई ने कटाक्ष किया कि मुख्यमंत्री की जैकेट की कीमत राज्य की प्रति व्यक्ति आय से भी अधिक है। 'गरीब राज्य के अमीर सीएम' सहित तमाम प्रतिक्रियाएं।
- समर्थक खेमा: झामुमो समर्थक इसे गर्व का विषय बता रहे। दावोस में हेमंत सोरेन सबसे 'बेस्ट ड्रेस्ड' मुख्यमंत्री दिखे। एक पूर्वांचली और आदिवासी नेता को वैश्विक मंच पर इस तरह देखना गर्व की बात है।
राजनीतिक मायने: क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ चौधरी कहते हैं, झारखंड में यह विवाद केवल कपड़ों तक सीमित नहीं है। भाजपा इस मुद्दे के जरिए हेमंत सोरेन की छवि को अमीर और जनता से कटे हुए नेता के रूप में पेश करना चाहती है, खासकर उन आरोपों के बीच जब उन पर जमीन घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामले में ED की जांच चल रही है।
वहीं, JMM इसे आदिवासी अस्मिता से जोड़कर पेश कर रही है। पार्टी का मानना है कि भाजपा यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही कि एक आदिवासी मुख्यमंत्री अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राज्य का नेतृत्व कर रहा है। चौधरी इस इश्यू को सही नहीं बताते।
राजनीतिक विश्लेषक ओमप्रकाश अश्क भी कहते हैं, यह पूरा विवाद गैरजरूरी है। झारखंड में इश्यूज की कमी नहीं है। उन पर बात होनी चाहिए। दावोस यात्रा से लौटे निवेश के वादे धरातल पर कितने उतरेंगे, यह तो समय बताएगा।
फिलहाल राज्य की राजनीति इस महंगे कोट के इर्द-गिर्द ही सिमटी नजर आ रही है। यह सही नहीं है। स्वच्छ राजनीति और राज्य के हित में इससे बचा जाना चाहिए।
