रांची, [जागरण स्‍पेशल]। शुरुआती दौर में बेहद धीमी चाल से चल रहा मानसून जुलाई के आखिर में पूरे रौ में नजर आया। झारखंड की राजधानी रांची समेत अन्‍य जिलों का हाल यह यह है कि बीते एक हफ्ते से यहां भगवान सूर्य का दर्शन तक नहीं हुआ है। बादलों की ओट में छिपे सूरज की लुकाछिपी के बीच झारखंड में कम वर्षापात का अंतर पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है। जून से चार महीने तक चलने वाले मानसूनी सीजन में अब तक यहां 522.2 मिमी वर्षापात के मुकाबले करीब 340 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

बीते माह की बात करें तो जून की बारिश सामान्य से 40 फीसद कम थी, वहीं पिछड़ रही खेती-किसानी को जुलाई ने भरसक बचाया है। अब खेतिहरों को अगस्‍त से और अच्‍छी बारिश की आस बंधी है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने जून में खराब शुरुआत के बाद जुलाई में जोरदार वापसी करते हुए दूसरे हफ्ते के बाद से सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। कृषि विभाग को उम्मीद है कि बेहतर बारिश से धानरोपनी सामान्य स्तर तक पहुंच सकती है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर भरोसा करें तो अगले पांच दिनों तक झारखंड के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। बताया गया कि जुलाई तक कम वर्षापात 30 फीसद से नीचे आ गया है। झारखंड के दो-तिहाई हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हुई है। अगस्त के अंत तक कम वर्षापात 10 फीसद तक सिमट कर रह जाएगा।

बहरहाल अगस्‍त के पहले हफ्ते की बारिश से कृषि क्षेत्र को काफी फायदा होगा। उम्मीद है कि सीजन खत्म होते-होते पिछले साल के बराबर धान की रोपाई हो जाएगी। मौसम विभाग के अनुसार जून से शुरू होकर सितंबर तक चलने वाले चार महीने के मानसूनी सीजन में 26 से 31 जुलाई तक 5 दिन में झारखंड में 55.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है। जबकि 1 जून से 25 जुलाई तक सिर्फ 60.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी।

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Posted By: Alok Shahi

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