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यातायात सुधार पर झारखंड हाई कोर्ट का सख्त आदेश, हजारीबाग में 20 चौराहों पर लगाएं ऑटोमेटेड ट्रैफिक लाइट

Published: Tue, 29 Sep 2026 06:21 PM (IST)

रांची हाई कोर्ट ने हजारीबाग की बदहाल यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने चार ...और पढ़ें

यातायात व्यवस्था सुधार को लेकर हाई कोर्ट में दाखिल की गई थी याचिका।

यातायात व्यवस्था सुधार को लेकर हाई कोर्ट में दाखिल की गई थी याचिका।

HighLights

  1. 20 प्रमुख चौराहों पर ऑटोमेटेड ट्रैफिक लाइट सिस्टम का ट्रायल शुरू होगा।

  2. हजारीबाग के डीसी, एसपी, नगर आयुक्त व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराए गए।

  3. खराब ट्रैफिक सिग्नल को 48 घंटे के भीतर ठीक करने का निर्देश।

राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने हजारीबाग की बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर कई दिशा निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने चार महीने के भीतर शहर के 20 प्रमुख चौक-चौराहों पर आटोमेटेड ट्रैफिक लाइट मैनेजमेंट सिस्टम का ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है।

खंडपीठ ने 10 सितंबर को जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था। खंडपीठ ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए हजारीबाग के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और नगर आयुक्त को यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।

अदालत ने तीनों अधिकारियों को चार महीने के भीतर अपने-अपने व्यक्तिगत अनुपालन को लेकर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अच्युत स्वरूप मिश्रा की ओर से वर्ष 2021 में दायर जनहित याचिका में हजारीबाग की अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था, फुटपाथों पर अतिक्रमण, पार्किंग की कमी, खराब ट्रैफिक सिग्नल और निष्क्रिय सीसीटीवी कैमरों का मुद्दा उठाया गया था।

अदालत के निर्देश पर नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त प्रशांत पल्लव ने शहर का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में कई प्रमुख चौक-चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति, खराब सिग्नल, बेतरतीब पार्किंग और यातायात नियमों के पालन में लापरवाही की पुष्टि हुई थी।

2.68 करोड़ में होगा काम

हाई कोर्ट ने आदेश में कहा कि नगर निगम ने पहले ट्रैफिक मानिटरिंग सिस्टम के लिए करीब 38.64 करोड़ रुपये की योजना बनाई थी, लेकिन इसकी लागत अधिक होने और वित्तीय स्वीकृति स्पष्ट नहीं होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ा।

बाद में नई निविदा प्रक्रिया के तहत 19 अगस्त 2026 को कीहोल डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के साथ करीब 2.68 करोड़ रुपये का समझौता किया गया। अदालत ने इस परियोजना को चार महीने में ट्रायल के लिए तैयार करने का निर्देश दिया है।

इनमें जिला कोर्ट चौक, कोर्रा चौक, बाबूगांव चौक, मटवारी चौक, सेंट कोलंबा कालेज मोड़, बड़कागांव मोड़, भारत माता चौक, पीटीसी चौक, डीवीसी चौक, सर्किट हाउस चौक, इंद्रपुरी चौक, झंडा चौक, पुराना और नया बस स्टैंड चौक, बंसिलाल चौक, सरदार चौक, कार्मेल स्कूल चौक, कल्लू चौक और पंच मंदिर चौक शामिल हैं।

48 घंटे में ठीक करने होंगे खराब सिग्नल

अदालत ने ट्रैफिक सिग्नल के रखरखाव के लिए तीन सदस्यीय निगरानी टीम गठित करने का आदेश दिया है। इसमें नगर निगम के सहायक अभियंता स्तर के अधिकारी, इंस्पेक्टर स्तर के ट्रैफिक पुलिस अधिकारी और संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि शामिल होंगे।

किसी सिग्नल खराब रहने पर उसे अगले 48 घंटे में ठीक करना होगा। साथ ही, सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर जेब्रा क्रासिंग और जरूरी यातायात संकेतक भी लगाने होंगे।

अतिक्रमण हटाने और पार्किंग व्यवस्था सुधारने का आदेश

अदालत ने सुबह आठ से रात आठ बजे तक अधिसूचित नगर निगम सीमा में भारी और व्यावसायिक मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रोक लागू करने का निर्देश दिया है। आवश्यक सेवाओं को छूट रहेगी। तीन महीने में निर्धारित पार्किंग स्थलों का नक्शा पेश करना होगा और फुटपाथों से अतिक्रमण हटाना होगा।

चार महीने में वेंडिंग और नान-वेंडिंग जोन अधिसूचित करने तथा बाइपास पर बस टर्मिनल के लिए जमीन की स्थिति स्पष्ट करने को भी कहा गया है। खंडपीठ ने कहा कि सुरक्षित शहरी जीवन और आवागमन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(डी) से जुड़ा है।

वित्तीय कमी, प्रशासनिक असुविधा और विभागों के बीच समन्वय का अभाव सार्वजनिक दायित्वों से बचने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने जनहित याचिका का निष्पादन करते हुए सभी निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने को कहा है।