चौपारण (हजारीबाग), [शशि शेखर]। अपनी मिट्टी का कर्ज चुका पाने का सपना बहुत लोग देखते हैं, लेकिन किसी-किसी को ही यह मौका मिल पाता है। हजारीबाग के चौपारण का एक बेटा लॉकडाउन में घर लौटा तो उसने अपने गांव और पंचायत की सूरत बदलने की ठानी। पेशे से इंजीनियर अमितेश अपनी कंपनी ओएनजीसी की मदद से अपने गांव दैहर को ग्रीनफील्ड स्मार्ट विलेज बनाने में जुटा है। ओएनजीसी फाउंडशन की मदद से गांव में पक्के मकान, बिजली, सड़क, स्कूल, अस्पताल, स्ट्रीट लाइट, वाइ-फाइ सेवा समेत तमाम सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान यहां 15 अगस्त को ऑनलाइन विकास कार्यों की शुरुआत करेंगे। अमितेश अपने सपने के साकार होने से खुश है। उसका कहना है कि गांव की सूरत बदल जाएगी तो उसके जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा हो जाएगा। अमितेश कुमार ने आइआइटी मुंबई से एमटेक की डिग्री ली है। वर्तमान में वह सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम उत्पादन कंपनी ओएनजीसी में एक्जीक्यूटिव अफसर के रूप में कार्यरत हैं।

लॉकडाउन के दौरान गांव पहुंचने पर उन्होंने खाली समय का उपयोग करते हुए गांव के विकास की रुपरेखा बनाई। अपनी परियोजना को कई फेज में बांटकर उन्होंने अपनी कंपनी को प्रस्ताव भेजा तो ओएनजीसी फाउंडेशन मदद को तैयार हो गया। प्रस्ताव इतना बेहतर लगा कि यह मंत्रालय तक भी पहुंच गया। प्रस्ताव में ओएनजीसी फाउंडेशन के अलावा कैब, ओला फाउंडेशन, टाटा पावर आदि से भी वित्तीय सहायता ली जा रही है।

घरों तक पाइप लाइन पहुंचाने का काम हो चुका है शुरू

इंजीनियर अमितेश कुमार ने पूरी योजना का नाम ग्रीन फील्ड स्मार्ट विलेज दिया है। अपने गांव को स्मार्ट विलेज बनाने के पहले चरण में गांव के 200 से अधिक घरों तक स्वच्छ जल पहुंचाने के उद्देश्य से पाइप लाइन बिछा ली गई है। एक माह पूर्व इसका काम भी शुरू हो चुका है। ओएनजीसी की वित्तीय सहायता से इसे अंजाम दिया गया।

अब दैहर स्मार्ट विलेज

परियोजना का उद्घाटन 15 अगस्त को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस व इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ऑनलाइन करेंगे। युवा अभियंता ने बताया कि परियोजना का पहला चरण प्रगति पर है। इसके अंतर्गत गांव के घरों में पाइप लाइन से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इसके बाद गांव के 50 गरीब परिवारों के लिए आवास भी बनाया जाएगा।

इस फेज के बाद गांव को बिजली, स्ट्रीट लाइट, हॉस्पीटल, स्कूल, वाई- फाई  व अन्य सुविधाओं से लैस किया जाएगा। कार्य को पूरा करने के लिए पूरे एक साल का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए अलग-अलग स्रोतों से 10 करोड़ रुपये से अधिक रकम का प्रबंध करने में जुटा हूं।

साधारण परिवेश में पले-बढ़े हैं अमितेश

बेहद साधारण परिवेश में पले-बढ़े अमितेश ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से सफलता की बड़ी लकीर खींची है। वह गांव के ही एक किसान परिवार से जुड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय से पढ़ाई कर अमितेश देश के सर्वोच्च तकनीकी संस्थान आइआइटी मुंबई से एमटेक कर ओएनजीसी में एग्जीक्यूटिव अधिकारी पद पर आसीन हैं।

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