हजारीबाग, [विकास कुमार]। लॉकडाउन में विद्यालय बंद होने से जब सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों (छात्र-छात्राओं) का पठन-पाठन प्रभावित होने लगा, हजारीबाग जिले के बरकट्ठा स्थित अपग्रेड हाई स्कूल बेलकप्पी के प्रधानाध्यापक छत्रू प्रसाद ने बच्चों की पढ़ाई का नया तरीका ढूंढ निकाला। कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण स्मार्टफोन से वंचित ऐसे विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा से जोडऩे की अनूठी पहल की।

इस बाबत उन्होंने विद्यालय के ही नौवीं और 10वीं कक्षा के कुछ सक्रिय विद्यार्थियों को जूम एप से जोड़कर सीक्रेट सुपर स्टार ग्रुप बना डाला। इन विद्यार्थियों को स्कूल क्षेत्र में पडऩे वाले 15 गांवों से दो-दो विद्यार्थियों के चयन की जिम्मेवारी सौंपी गई। ग्रामवार चयनित इन दो-दो विद्यार्थियों को जूम एप के सहारे अपने गांव में अपनी कक्षा और जूनियर वर्ग के बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई में मदद करने का जिम्मा दिया गया। गांव के बच्चों की पढ़ाई में आ रही दिक्कतों को दूर करने की कोशिश ग्रुप के स्टार बच्चों ने पहले अपने स्तर पर की।

फिर जहां समस्या दिखी, उसे प्रधानाध्यापक तक पहुंचाया। इसके बाद प्रधानाध्यापक ने स्वयं संबंधित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मिलकर उनकी समस्या का निपटारा किया। प्रधानाध्यापक ने सीक्रेट सुपर स्टार ग्रुप के अलावा ऑनलाइन पढ़ाई के लिए विद्यालय में तीन अलग-अलग ग्रुप बनाए। इसका असर यह हुआ कि 600 विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय के 90 फीसद बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई की प्रक्रिया से जुड़ गए।

हर दूसरे दिन देना होता है फीडबैक

सीक्रेट सुपर स्टार ग्रुप के विद्यार्थियों को हर दूसरे दिन जूम एप के माध्यम से फीडबैक देना होता है। इसमें बच्चे बताते हैं कि इन्होंने कैसे अपने गांव के दूसरे बच्चों को आनलाइन पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। शुरुआती दौर में आनलाइन पढ़ाई से सिर्फ 60 फीसद बच्चे ही जुड़ सके थे। कई बच्चों के अभिभावकों के नंबर नहीं थे। धीरे-धीरे विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों में जागरूकता आई और बच्चे नियमित ऑनलाइन कक्षा के हिस्सा बन गए।

राज्य सरकार को भाया मॉडल, मिला प्रशस्ति पत्र

पढ़ाई के सीक्रेट सुपर स्टार मॉडल को राज्यस्तर पर सराहना मिली है। इसकी जानकारी जब राज्य शिक्षा परियोजना निदेशक उमाशंकर सिंह के पास पहुंची तो उन्होंने इसकी सच्चाई पता कर दो दिनों में शिक्षा पदाधिकारी को रिपोर्ट देने को कहा। रिपोर्ट में मॉडल की तारीफ करते हुए पूरी जानकारी दी गई। इसके बाद विद्यालय के शिक्षक को पढ़ाई के इस नए तरीके के लिए निदेशक उमाशंकर सिंह के द्वारा प्रशस्ति पत्र भी दिया गया है।

'लॉकडाउन में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई थी। अत्यंत गरीब को छोड़कर लगभग हर परिवार के पास अब स्मार्ट मोबाइल फोन है। सभी बच्चों से संपर्क कर इस तरह से पढ़ाने का काम शुरू किया गया। इसमें कुछ प्रतिभावान विद्यार्थियों का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा। जिन बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं है, वे गांव के अन्य बच्चों के पास बैठकर पढ़ रहे हैं।' -छत्रू प्रसाद, प्रधानाध्यापक।

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