रांची : झारखंड में विपक्षी महागठबंधन को लेकर आगे बढ़ रही कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के मतभेद उभर रहे हैं। सोमवार को कांग्रेस द्वारा आहूत भारत बंद के दौरान यह मतभेद झलका। बंद से पूर्व ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के रूख को देखकर कांग्रेसी खेमे में बेचैनी थी। कांग्रेस के वरीय नेता यह पता लगाने में जुटे रहे कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बंद को सक्रिय समर्थन देने का एलान किया अथवा नहीं? उधर झारखंड मुक्ति मोर्चा के रणनीतिकारों ने इसे लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने में थोड़ी देर की तो कयास को बल मिला। हालांकि मोर्चा के केंद्रीय नेतृत्व ने यह घोषणा की कि पार्टी बंद का सक्रिय समर्थन करेगी। महासचिव सुप्रियो भंट्टाचार्य ने बकायदे विज्ञप्ति तक जारी की लेकिन राजधानी में बंद के दौरान झामुमो नेताओं का सड़क पर नहीं उतरना उन्हें खल रहा है।

कांग्रेस इस पर खुलकर कुछ भी बोलने से परहेज कर रही है लेकिन भितरखाने यह चर्चा का विषय बना हुआ है। वरिष्ठ नेताओं ने यह बात प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाई है। सभी अपनी सहूलियत की लिहाज से इसकी व्याख्या करने में भी लगे हैं। अगर दोनों दलों के बीच इस मसले पर मतभेद उभरे तो खाई चौड़ी हो सकती है। गौरतलब है कि कांग्रेस आलाकमान ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य में चुनाव लड़ने की घोषणा कर रखी है। बदले माहौल में कांग्रेस में इस पुनर्विचार की मांग तेज हो सकती है। जिसका सीधा असर गठबंधन की सेहत पर पड़ेगा। हालांकि सोमवार को भारत बंद के दौरान विपक्षी दलों के संयुक्त धरने में हेमंत सोरेन नई दिल्ली जाकर शामिल हुए थे।

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सबसे ज्यादा हुई हमारे कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी : झामुमो

झामुमो महासचिव सुप्रियो भंट्टाचार्य ने स्वीकारा कि राजधानी में पार्टी नेता दुर्गा उरांव की जयंती समारोह में व्यस्त रहें लेकिन पूरे राज्य में सबसे ज्यादा झामुमो कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई। बारह हजार गिरफ्तारियों में चार हजार की संख्या झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं की थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते मूल्य के खिलाफ भारत बंद को सक्रिय समर्थन की एलान किया था।

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गठबंधन पर असर की संभावना नहीं : कांग्रेस

कांग्रेस का दावा है कि विपक्षी महागठबंधन में दरार डालने की कोशिश कामयाब नहीं होगी। प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश ठाकुर के मुताबिक गठबंधन प्रदेश के हित को ध्यान में रखकर बनाया गया है। जनता भाजपा के कामकाज के तरीके से ऊब चुकी है। तमाम विपक्षी दलों ने बढ़-चढ़कर बंद में हिस्सा लिया। कांग्रेस की मजबूती का अहसास उन लोगों को हो गया होगा तो कांग्रेस मुक्त भारत का खोखला नारा देते घूम रहे हैं।

Posted By: Jagran