रांची, जासं। कोरोनावायरस के नए स्ट्रेन में बुखार अथवा खांसी जल्‍दी ठीक नहीं हो रहा है। लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। कोरोना संक्रमित मरीज लगातार चिकित्सक के संपर्क में रहें। इस समय प्रत्येक लोग अपने-अपने घरों में ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर आदि जरूरी के सामान रखें। अगर बुखार 100 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो तो कालपोल खिलाएं। दिनभर में कालपोल का चार ग्राम डोज ले सकते हैं। गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिए भी कालपोल सुरक्षित है। अगर परिवार का कोई सदस्य कोरोना संक्रमित हो गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऑक्सीमीटर से लगातार ऑक्सीजन लेवल जांचते रहें। ऑक्सीजन लेवल 94 से नीचे आ रहा है तो तुरंत किसी चिकित्सक से संपर्क करें। आप घर पर रहकर भी इलाज करा सकते हैं। ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदकर मरीज को लगाना सीख लें।

इमरजेंसी की स्थिति में ही अस्पताल में भर्ती हों

कई बार देखा गया है कि कोरोना संक्रमित मरीज की स्थिति ठीक रहने के बावजूद अपने प्रभाव के इस्तेमाल से अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं। यह मानवता के खिलाफ है। ध्यान रखें कि किसी जरूरतमंद के लिए एक बेड घट गया। हालांकि, अगर जरूरत हो तो बेशक भर्ती होना चाहिए।

कोरोना से बचना है तो खानपान रखें दुरुस्त, जमकर पीएं पानी

कोरोना संक्रमण की अभी तक कोई खास दवा नहीं है। सर्दी, बुखार और अन्य संक्रामक रोग में काम आने वाला दवा ही चलाया जाता है। इसी से मरीज ठीक हो रहे हैं। ध्यान रखने योग्य बात यह है कि कोरोना संक्रमण दवा से नहीं बल्कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता से ठीक होता है। ऐसे में जो संक्रमित हैं या जो संक्रमित नहीं भी हुए हैं, उन्हें भी अपने खान-पान पर ध्यान देना होगा। हेल्दी भोजन करें। प्रोटीन, विटामिनयुक्त भोजन करें। मांस, मछली, चिकेन, दाल, मशरूम, पनीर आदि का सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा। वहीं, विटामिन सी के लिए संतरा, नींबू आदि लेते रहें। भरपूर पानी पीना लाभदायक होता है।

खांसी-सर्दी में भी ले सकते हैं संतरा, नींबू

एक धारणा है कि खांसी, सर्दी की स्थिति में फल खासकर खट्टे फल, नींबू आदि नहीं खाना चाहिए। यह तथ्यहीन बातें हैं। चिकित्सक की राय मानें तो बीमार व्यक्ति दिन या रात जब चाहे फल खा सकते हैं। अगर गले में खसखस है तो फल पर नमक और काली मिर्च का पाउडर छिड़ककर खा सकते हैं। इससे बीमारी जल्द ठीक होगा।

प्राणायाम के अभ्यास से बचेगा फेफड़ा

कोरोना का संक्रमण फेफड़े को जल्दी डैमेज करता है। इससे बचाव के लिए गुणगुणा पानी का सेवन करें। दिनभर में चार-पांच बार भाप ले सकते हैं। 5-10 मिनट का प्राणायाम भी फेफड़े को डैमेज होने से बचाता है। कोरोना संक्रमित मरीज जब चाहें, लंबी सांस लें और छोड़ें। इससे फेफड़े का व्यायाम होता है।

नया स्ट्रेन में जल्दी नहीं उतरता बुखार

कोरोना के नए स्ट्रेन में यह देखने को मिल रहा है कि लगातार दवा खाने के बावजूद बुखार और खांसी ठीक नहीं होती है। यह सच है लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। घर में रहकर दवा लेते रहें।

शंका हो तो तुरंत काेविड जांच कराएं

पिछले साल के संक्रमण और इस साल के नए स्ट्रेन में भिन्नता है। पिछले साल कोरोना संक्रमित मरीज को सर्दी, बुखार आदि होता था। नए स्ट्रेन में थोड़ा बदन दर्द, सुस्ती रहती है। लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। बाद में सीधे निमोनिया हो जा रहा है। ऐसे में स्थिति गंभीर बन जाती है। ऐसा अगर थोड़ा सा भी लक्षण दिखे तो तुरंत कोविड जांच कराएं, ताकि समय रहते इलाज हो सके। -डॉ. करुणा झा, सेवानिवृत प्रोफेसर, स्त्री रोग विभाग, रिम्स।

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