राज्य ब्यूरो, रांची। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को विधानसभा नियुक्ति-प्रोन्नति घोटाले मामले में जस्टिस विक्रमादित्य आयोग की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई का निर्देश विधानसभाध्यक्ष डा. दिनेश उरांव को दिया है। उन्होंने आयोग की जांच रिपोर्ट उन्हें भेजकर की गई अनुशंसा पर समुचित कार्रवाई करने को कहा है। इससे विधानसभा में नियम विरुद्ध नियुक्त कुछ कर्मियों की नौकरी जाएगी तो कई पदाधिकारी और कर्मचारी डिमोट होंगे। राज्यपाल ने विधानसभाध्यक्ष को लिखे गए पत्र में घोटाले से जुड़े किसी मामले में कोई अलग से निर्देश नहीं दिया है। उन्होंने सिर्फ उसपर समुचित कार्रवाई करने को कहा है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा में नियुक्ति व प्रोन्नति में भारी गड़बड़ी हुई है। नियम-कानून को ताक पर रखकर यह सब किया गया। हालांकि नियुक्ति के मामलों में संबंधित कर्मियों पर कोई कार्रवाई की अनुशंसा नहीं की गई है, लेकिन इसमें संलिप्त पदाधिकारियों व कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही गई है। वहीं, गलत ढंग से प्रोन्नत सभी पदाधिकारी और कर्मी डिमोट किए जाएंगे। इसकी अनुशंसा की गई है।

बताया जाता है कि आयोग ने इन मामलों में दोषी पाए गए पूर्व विधानसभाध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी, आलमगीर आलम, शशांक शेखर भोक्ता तथा विधानसभा के तत्कालीन प्रभारी सचिव अमरनाथ झा के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की भी अनुशंसा की है। इधर, आयोग तत्कालीन विधायक सरयू राय (वर्तमान में खाद्य आपूर्ति मंत्री) द्वारा विधानसभा को सौंपी गई सीडी का तकनीकी रूप से जांच नहीं कर सका। आयोग ने इसकी सीबीआइ जांच की अनुशंसा की है। सरयू राय ने विधानसभा को यह सीडी सौंपकर विधानसभा में हुई नियुक्ति में बड़े पैमाने पर लेनदेन का आरोप लगाया था।

बैकडोर से कर ली नियुक्ति रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा में उन कर्मियों की बैकडोर से नियुक्ति कर दी गई थी, जिन्हें बिहार विधानसभा में हटा दिया गया था। राज्य गठन के बाद हटाए गए कर्मी यहां फिर से बहाल हो गए। आयोग ने इन सभी को बर्खास्त करने के साथ-साथ मामले में दोषी सभी लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा की है।

राज्यपाल से स्वीकृत फाइल में भी छेड़छाड़ विधानसभा के तत्कालीन प्रभारी सचिव अमरनाथ झा ने राज्यपाल से स्वीकृत फाइल में भी छेड़छाड़ कर दी थी। विधानसभा सहायकों के 75 सहायकों के पद सृजन की फाइल में यह छेड़छाड़ हुई। आयोग ने जांच के क्रम में उसमें तेरह जगहों पर छेड़छाड़ पाई। इसकी पुष्टि राजभवन से भी कराई गई।

सहायकों के 75 पद थे, कर दिए 150 राज्यपाल ने विधानसभा में 75 पदों के पद सृजन की स्वीकृति दी थी। लेकिन विधानसभा के तत्कालीन प्रभारी सचिव अमरनाथ झा ने उसे 75 प्लस 75 कर दिया। इससे गजट में कुल 150 पद सृजित हो गया।

राज्यपाल ने अध्ययन के बाद लिया निर्णय राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने जांच रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया। इसके बाद ही उन्होंने उसपर कार्रवाई का निर्देश विधानसभाध्यक्ष को दिया। जस्टिस विक्रमादित्य ने 17 जुलाई को ही अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी थी। उन्होंने उसकी एक प्रति विधानसभा को भी भेजी थी।

सैयद अहमद ने दिया था जांच का आदेश तत्कालीन राज्यपाल डॉ. सैयद अहमद ने विधानसभा नियुक्ति, प्रोन्नति घोटाले की जांच का आदेश दिया था। सबसे पहले जस्टिस लोकनाथ प्रसाद की अध्यक्षता में यह जांच आयोग गठित की गई थी। लेकिन बाद में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। इस जांच आयोग के कार्यकाल का कई बार अवधि विस्तार हुआ।

सीबीआइ जांच की अनुशंसा संभव विधानसभा सचिवालय नियुक्ति घोटाले की सीबीआइ जांच की अनुशंसा कर सकता है। न्यायमूर्ति विक्रमादित्य आयोग ने इस बाबत राज्यपाल को अनुशंसा की थी। आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि दो पूर्व विधानसभा अध्यक्षों इंदर सिंह नामधारी और आलमगीर आलम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा सकती है। दोनों के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। बहरहाल स्पीकर दिनेश उरांव के निजी दौरे से वापसी के बाद ही आयोग की सिफारिशों पर विचार होगा। स्पीकर फिलहाल राज्य से बाहर हैं। विधानसभा सचिवालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी। वे संभवत: बुधवार को वापस लौटेंगे।

अपनी बात रख चुके हैं दो पूर्व स्पीकर : विधानसभा नियुक्ति घोटाले की जांच कर चुके न्यायिक आयोग ने दोनों पूर्व विधानसभा अध्यक्षों पर लगे आरोपों के संदर्भ में पूछताछ की थी। इस बाबत लिखित उत्तर सौंपा गया था। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी और आलमगीर आलम आरोपों को बेबुनियाद बताते रहे हैं। नामधारी ने कहा है कि जब मौका आएगा तो वे अपनी बातें विस्तार से लोगों के समक्ष रखेंगे, जबकि आलमगीर आलम कह चुके हैं कि उन्होंने कोई अनियमितता नहीं की और अपने लिखित जवाब से आयोग को अवगत करा चुके हैं।