रांची, जासं। Good Friday 2021 चालीसा काल का पुण्य बृहस्पतिवार पर राजधानी के विभिन्न गिरिजाघरों में विशेष प्रार्थना हुई। पुरोहितों के देखरेख में धर्मविधि पूर्ण करायी गई। पुरुलिया रोड स्थित संत मारिया गिरिजाघर में संध्या छह बजे धर्मविधि आरंभ हुई। आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो ने अनुष्ठान कराया। प्राचीन रिवाज के अनुसार बीमारों, दीक्षार्थियों और ख्रीस्मा के तेलों की आशीष दी गई। धर्म विधि का लाइव प्रसारण किया गया। जो विश्वासी गिरिजाघर नहीं आ सके अपने घरों में ही परिवार के साथ अनुष्ठान में सहभागी बना। ईसा मसीह का स्मरण कर शांति व करुणा प्रदान करने की कामना की। इसके अलावा बहुबाजार स्थित संत पॉल गिरिजाघर, मेनरोड जीईएल सहित शहर के अन्य गिरिजाघरों में विशेष अनुष्ठान हुए। शुक्रवार को गुड फ्राइडे अथवा पुण्य शुक्रवार मनाया जाएगा। प्रार्थनाएं होगी। प्रभु के बलिदानी और दुखभोग का स्मरण किया जाएगा।

पुण्य बृहस्पतिवार पर आर्च बिशप का संदेश

धर्मविधि के उपरांत आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो ने संदेश सुनाया। आर्च बिशप ने कहा कि प्रभु येसु मसीह के हृदय में संपूर्ण मानव जाति के लिए प्रेम है। अपनी मृत्यु के एक दिन पहले निश्चित रूप से उनका मन अत्यंत विचलित और दिल भारी था। वे जानते थे कि उन्हें भयंकर शारीरिक पीड़ाएं सहनी पड़ेंगी। वे मानसिक संताप से भी आहत थे। उनके दुःख को और अधिक बढ़ाने के लिए उनके स्वर्गीय पिता ने अपना चेहरा छिपा लिया था और सभी दूतों को येरुसालेम से वापस बुला लिया था। ऐसी मनःस्थिति में वे अपने प्रिय मित्रों के साथ पास्का का भोज कर रहे हैं।

यह प्रभु येसु के लिए विदाई की संध्या है। इस अवसर पर प्रभु येसु के हृदय में सारी मानव जाति के प्रति अगाध प्रेम छलक रहा था। अपने प्रेरितों के पैर धेकर सारी मनुष्य जाति के लिए प्रेम का उदाहरण दियाआज पूरे विश्व में अहंकार, काम-वासना, स्वार्थ, अन्याय-शोषण, झगड़े आदि हो रहे हैं। ईश्वर को और उसकी आज्ञाओं को लोगों ने अपने मन-दिल से निकाल कर अपने पैरों तले कुचल दिया है। कुछ धनी और शक्ति अधिकार से लैस हैं जबकि असंख्य लोग लाचार, परित्यक्त और विवश हैं।

इन सबको देखकर हमारे प्रभु का करुणामय ह्नदय अत्यंत दुःखित है। क्रूस पर टंगे येसु की प्यास आत्माओं और प्रेम की प्यास थी और मृत्यु पर्यंत उनके हृदय से प्रेममय करुणा फूट पड़ी थी। ऐसी परिस्थिति में हम पुरोहितों का कर्तव्य है कि हम खोयी हुई आत्माओं को प्रभु के पास लाएं और प्रभु के प्रेम को प्रकट करें। हम पुरोहितों को चाहिए कि लोभ-मोह से रहित होकर अपना जीवन येसु को समर्पित करें।

पुण्य बृहस्पतिवार को धर्म विधि के दौरान आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो ने अपने हाथों से 12 शिष्यों के पैर धाये। उनके साथ भोजन किया। उन्हें प्रभु का संदेश सुनाते हुए दूसरों की सेवा की करने को प्रेरित किया। मान्यता है कि प्रभु येसु मसीह ने दुख भोग व क्रूस मरण के पहले येरूशलम जाते वक्त 12 शिष्यों के पैर धाये और उनके साथ अंतिम ब्यालू (अंतिम बार भोजन) किया। उन्होंने शिष्यों को शिक्षा दी कि जिस प्रकार गुरु होकर मैं तुम्हारा पैर धो रहा हूं उसी प्रकार तुम भी दूसरों की सेवा करो।

प्रात: कालीन प्रार्थना सुबह छह बजे

मुख्य प्रार्थना:संध्या 4.30 बजे से संत मारिया गिरिजाघर में होगा।

संदेश

प्रिय भाइयो और बहनो, इस बात को गांठ बांध कर रख लें कि ईश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को पवित्र आत्मा से अभ्यंजित करके ख्रीस्त तथा प्रभु नियुक्त किया है और हमें भी उसके पावन अभिषेक में भाग दिया है। इस महान वरदान के लिए हम ईश्वर को धन्यवाद दें और इस जगत में प्रभु ख्रीस्त की अनंत मुक्ति के साक्षी बनें। दीन दुखियों की सेवा करें।

क्रूस पर टांगने के दौरान प्रभु ने सात वचन दिए....

प्रभु के हाथों व पैरों में कीलों को ठोका गया। क्रूस पर 6 घंटे लटकाया गया। इस दौरान प्रभु यीशु ने 7 वचन दिये।-पहला-हे पिता इन्हें क्षमाकर क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं?-दूसरा- मैं तुझसे सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।-तीसरा-हे नारी देख ये तेरा पुत्र है तब उस चेले से कहा यह तेरी माता है।-चौथा-इलोई इलोई लमा शबक्तनी? हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?-पांचवां-मैं प्यासा हूं।-छठा-पूरा हुआ।-सातवां- हे पिता मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं।

सुबह छह बजे सूली पर चढ़ाया गया था प्रभु को

बाइबिल के अनुसार प्रभु यीशु को शुक्रवार की सुबह नौ बजे क्रूस पर चढ़ाया गया और उसी दिन सूर्यास्त से पहले कब्र में रख दिया गया। उस समय प्रभु यीशु की आयु केवल 33 वर्ष की थी। जब प्रभु को क्रूस पर चढ़ाया गया तो उनके बांयी व दायीं ओर एक-एक डाकू भी क्रूस पर लटकाया गया और उनको भी मृत्युदंड दिया जा रहा था।

क्यों मनाया जाता है गुड फ्राइडे

दुनिया को प्रेम, दया और करुणा का देने वाले प्रभु ईसा मसीह को धार्मिक कट्टरपंथियों ने सूली पर टांग दिया था। मानव के काल्याण हेतु प्रभु सहर्ष सूली चढ़ गए। सूली पर चढ़ाये जाने के समय भी उनके दिल में करूणा का भाव था। उन्होंने ईश्वर से ऐसा कृत्य करने वालों को क्षमा कर देने की विनती थी। प्रभु को शुक्रवार को ही सूली पर टांगा था। इस कारण इस दिन को गुड फ्राइडे के रूप में मनाया जाता है।

ईसाई धर्मावलंबी इस दिन शोक मनाते हैं। प्रार्थना करते हैं एवं प्रभु की बलिदानी को स्मरण करते हैं। बड़ी संख्या में लोग गुड फ्राइडे के दिन उपवास भी रखते हैं। हालांकि, मृत्यु के तीसरे दिन रविवार को प्रभु जीवित हो उठे। प्रभु के पुन: जीवित होने का दिन ईसाई धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन को ईस्टर पर्व मनाया जाता है। प्रभु के आगमन की खुशियां मनायी जाती है।

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