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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

झारखंड के फेरीवालों के आएंगे अच्छे दिन

By Bhupendra SinghEdited By:
Published: Sun, 02 Apr 2017 06:46 AM (IST)Updated: Sun, 02 Apr 2017 06:55 AM (IST)

सरकार सड़क के किनारे अथवा फुटपाथ पर दुकान सजाने तथा गली-गली में घूमकर उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री करने वाले दुकानदारों को मुख्यधारा से जोड़ेगी।

झारखंड के फेरीवालों के आएंगे अच्छे दिन
झारखंड के फेरीवालों के आएंगे अच्छे दिन

विनोद श्रीवास्तव, रांची। सरकार सड़क के किनारे अथवा फुटपाथ पर दुकान सजाने तथा गली-गली में घूमकर उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री करने वाले दुकानदारों को मुख्यधारा से जोड़ेगी। सरकार ने इस बाबत झारखंड पथ विक्रेता (आजीविका संरक्षण एवं विनियमन) योजना 2017 तैयार की है। सरकार की योजना ऐसे दुकानदारों को अलग-अलग वर्गों में बांटकर उन्हें बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की है। फेरीवालों के लिए बनने वाली दुकानों में से 37 फीसद दुकानें महिलाओं, दिव्यांगों, विधवाओं आदि के लिए आरक्षित होंगी। दुकानों का आवंटन लॉटरी पद्धति से होगा। हर तीन वर्षों पर फेरीवालों का नए सिरे से सर्वे और निबंधन होगा। सरकार इस एवज में उनसे क्षेत्रवार शुल्क भी वसूलेगी। झारखंड शिक्षित बेरोजगार फुटपाथ दुकानदार महासंघ की ओर से कराए गए हालिया सर्वे के अनुसार झारखंड में फुटपाथ पर दुकान सजाने वालों की संख्या 1.80 लाख है।
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सर्वेक्षण के लिए गठित होगा दल
फेरीवालों की अद्यतन संख्या जानने के लिए सरकार एक दल गठित करेगी। दल में राजस्व निरीक्षक, टैक्स कलेक्टर, सामुदायिक संगठनकर्ता, सिटी मिशन मैनेजर, शहरी निकायों के वार्ड प्रभारी, निकाय स्तर से नामित स्वयं सेवी संगठनों के दो सदस्य, वेंडर संघ के दो प्रतिनिधि आदि शामिल होंगे।
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अलग-अलग श्रेणियों में बांटे जाएंगे फेरीवाले
सरकार कारोबार की श्रेणी के हिसाब से फेरीवालों को तीन अलग-अलग में वर्गों में बांटेगी। यह श्रेणी स्थाई पथ विक्रेता, चलते-फिरते फेरीवाले, घुमंतू, मौसमी, साप्ताहिक, त्योहार आदि पर कारोबार करने वाले दुकानदारों की होगी।
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विशेष वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगी 37 फीसद दुकानें
फेरीवालों के लिए बनने वाली दुकानों में से 37 फीसद दुकानें आरक्षित रहेंगी। इनमें से पुरुष एवं महिला दिव्यांगों के लिए क्रमश: 1.5-1.5 फीसद दुकानें आरक्षित रहेंगी। वरिष्ठ पुरुषों के लिए 1.5 तथा वरिष्ठ महिलाओं के लिए दो फीसद, परित्यक्ता और विधवाओं के लिए पांच फीसद, तृतीय लिंग समुदाय के लिए .5 एवं अन्य महिलाओं के लिए 24.5 फीसद दुकानें आरक्षित रहेंगी।
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- पंजीकरण शुल्क के रूप में फेरीवालों को करना होगा 100 रुपये का भुगतान। तीन वर्षों पर नवीकरण के वक्त भी देनी होगी इतनी ही राशि।
- पथ विक्रेता पहचान पत्र एवं विक्रय प्रमाणपत्र के एवज में स्थानीय शहरी निकाय भी चिह्नित दुकानदारों से 100 रुपये लेगा।
- संबंधित राशि पथ विक्रेता विकास कोष में जमा होगी। इस बाबत किसी राष्ट्रीय बैंक में खाता खोला जाएगा।
- सभी प्रकार की दुकानों का क्षेत्रफल छह गुना चार फीट होगा। दो पंक्ति की दुकानों के बीच दो मीटर का स्थान रास्ते के लिए छोड़ा जाएगा।
- बड़े भूखंड में कुल भूमि के 30 फीसद हिस्से का उपयोग बुनियादी सुविधाओं के लिए किया जाएगा।
- शेष 70 फीसद भूमि में से 45 फीसद भूमि बैठकर उपभोक्ता सामग्री बेचने वालों तथा 25 फीसद चलंत दुकानों के लिए आरक्षित रहेगी।

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