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गोला का शकरकंद अब बांग्लादेश तक, झारखंड के किसानों को मिल रहा बड़ा बाजार और बेहतर मुनाफा

Published: Tue, 06 Oct 2026 05:47 PM (IST)

गोला प्रखंड का शकरकंद अब स्थानीय बाजारों से निकलकर दूसरे राज्यों और बांग्लादेश तक पहुंच रहा है, जिससे किसानों को ...और पढ़ें

दुर्गा पूजा के कारण मांग में वृद्धि हुई है।

दुर्गा पूजा के कारण मांग में वृद्धि हुई है।

अंजनी कुमार, गोला (रामगढ़)। गोला प्रखंड में उत्पादित शकरकंद अब स्थानीय और आसपास के बाजारों तक सीमित नहीं रह गया है। क्षेत्र में तैयार होने वाला शकरकंद अब दूसरे राज्यों के बाजारों के साथ बांग्लादेश तक पहुंच रहा है। इससे शकरकंद की खेती करने वाले किसानों को नया बाजार मिलने की उम्मीद जगी है।

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, गोला क्षेत्र के शकरकंद की गुणवत्ता और स्वाद के कारण इसकी मांग लगातार बनी हुई है। खासकर दुर्गा पूजा को लेकर इसकी मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है।गोला प्रखंड के विभिन्न गांवों में बड़े पैमाने पर शकरकंद की खेती की जाती है।

किसानों के अनुसार, यहां की मिट्टी और स्थानीय कृषि परिस्थितियां शकरकंद की खेती के लिए अनुकूल हैं। यही वजह है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती करते हैं।

वर्तमान में प्रखंड क्षेत्र में करीब पांच सौ एकड़ से अधिक भूमि पर शकरकंद की खेती होने की बात सामने आ रही है। फसल तैयार होने के बाद किसान इसे स्थानीय व्यापारियों को बेचते हैं। व्यापारी आसपास के संग्रहण केंद्रों से शकरकंद की खरीद कर उसे बड़े बाजारों तक पहुंचाते हैं।

रोजाना 15 से 20 ट्रक भेजे जा रहे

शकरकंद की मांग बढ़ने के साथ ही इसका कारोबार भी तेजी से बढ़ा है। व्यापार से जुड़े लोगों के अनुसार, इन दिनों प्रतिदिन करीब 15 से 20 ट्रक शकरकंद गोला क्षेत्र से बाहर भेजे जा रहे हैं। ट्रकों के माध्यम से शकरकंद को सबसे पहले कोलकाता भेजा जाता है। वहां से व्यापारिक नेटवर्क और विभिन्न माध्यमों के जरिए इसे बांग्लादेश के बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है।

इस कारोबार में स्थानीय व्यापारियों के साथ बाहर के कारोबारी भी सक्रिय हैं।व्यापारियों का कहना है कि शकरकंद की खरीद के लिए इन दिनों किसानों के खेतों और स्थानीय बाजारों में व्यापारियों की आवाजाही बढ़ गई है। तैयार फसल को छंटाई और पैकिंग के बाद ट्रकों में लोड किया जाता है। इसके बाद खेप को कोलकाता के बड़े बाजारों तक पहुंचाया जाता है। वहां से आगे की आपूर्ति की जाती है।

दुर्गा पूजा को लेकर मांग में इजाफा

दुर्गा पूजा के अवसर पर शकरकंद की मांग बढ़ने से कारोबारियों की सक्रियता भी बढ़ी है। पूजा और त्योहार के दौरान विभिन्न बाजारों में इसकी खपत बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए व्यापारी अधिक मात्रा में शकरकंद की खरीद कर रहे हैं। गोला क्षेत्र से बाहर जाने वाली खेपों की संख्या भी इस समय बढ़ी हुई बताई जा रही है।

किसानों का कहना है कि त्योहार के समय बाजार में मांग बढ़ने से उन्हें अपनी उपज बेचने में आसानी होती है। पहले स्थानीय स्तर पर ही बाजार तलाशना पड़ता था, लेकिन अब बड़े व्यापारियों के माध्यम से दूसरे राज्यों और बांग्लादेश तक बाजार उपलब्ध होने से बिक्री का दायरा बढ़ा है।

किसानों को बेहतर कीमत की उम्मीद

शकरकंद के लिए बड़ा बाजार मिलने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी उपज को उचित बाजार तक पहुंचाना रही है। यदि स्थानीय स्तर पर मांग कम रहती है तो किसानों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है।

वहीं बाहर के बाजारों से मांग आने पर व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। किसानों का कहना है कि शकरकंद की खेती अपेक्षाकृत कम समय में तैयार होने वाली फसलों में शामिल है।

बाजार उपलब्ध होने के कारण कई किसान अब इसकी खेती का रकबा बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि कीमत बाजार की मांग, गुणवत्ता, उत्पादन और परिवहन लागत पर निर्भर करती है। गोला में शकरकंद की खेती पहले से ही कई गांवों में होती रही है।

अब जब इसकी मांग दूसरे राज्यों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की बात सामने आ रही है, तो किसानों में इस फसल को लेकर रुचि बढ़ने की संभावना है। कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि किसानों को नियमित बाजार, उचित मूल्य, भंडारण और परिवहन की बेहतर सुविधा मिले तो शकरकंद की खेती का दायरा और बढ़ सकता है।

बड़े बाजार से जुड़ने का लाभ केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। इससे स्थानीय स्तर पर शकरकंद की खुदाई, छंटाई, पैकिंग, लोडिंग और परिवहन से जुड़े लोगों को भी रोजगार मिलता है। व्यापारियों के लिए भी एक नई आपूर्ति श्रृंखला विकसित होती है।

कोलकाता बना प्रमुख पड़ाव

गोला क्षेत्र से बांग्लादेश तक शकरकंद पहुंचाने की प्रक्रिया में कोलकाता प्रमुख पड़ाव के रूप में सामने आ रहा है। यहां तक सड़क मार्ग से शकरकंद की खेप भेजी जाती है। इसके बाद विभिन्न व्यापारिक माध्यमों के जरिए इसे बांग्लादेश के बाजारों तक भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय व्यापारी, परिवहन कारोबारी और बड़े बाजारों से जुड़े कारोबारी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

व्यापारियों के अनुसार, शकरकंद को समय पर बाजार तक पहुंचाना जरूरी होता है। इसलिए फसल की खुदाई के बाद उसकी छंटाई, पैकिंग और परिवहन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। लंबी दूरी तक भेजे जाने वाले उत्पाद में गुणवत्ता बनाए रखना कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है।

बांग्लादेश तक बाजार मिलने की खबर से गोला के शकरकंद उत्पादक किसानों में उत्साह है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में मांग बढ़ने के साथ उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। यदि बाजार की मांग लगातार बनी रहती है तो अगले सीजन में शकरकंद की खेती करने वाले किसानों की संख्या और खेती का क्षेत्रफल बढ़ सकता है।

हालांकि किसानों के लिए केवल बाजार उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज, सिंचाई, कृषि तकनीक, भंडारण सुविधा, उचित परिवहन और बाजार की पारदर्शी जानकारी भी उपलब्ध कराने की जरूरत है। इससे किसान अपनी उपज को सही समय और सही बाजार में बेच सकेंगे।

गोला से निकलकर कोलकाता और वहां से बांग्लादेश तक पहुंच रहा शकरकंद क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर की तस्वीर पेश कर रहा है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन और बाहर के बाजारों से बढ़ती मांग के बीच यदि किसानों को मजबूत बाजार व्यवस्था मिलती है तो शकरकंद गोला क्षेत्र की प्रमुख व्यावसायिक फसलों में अपनी जगह और मजबूत कर सकता है।

गोला में शकरकंद की खेती के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। यहां की मिट्टी पोषक तत्वों से भरपूर है, जिसके कारण क्षेत्र में उत्पादित शकरकंद की गुणवत्ता अच्छी होती है और इसकी मांग अधिक रहती है। खास बात यह है कि यहां लता से शकरकंद का उत्पादन किया जाता है।
-अनिल कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, गोला

शकरकंद के स्वास्थ्य लाभ

  • पाचन तंत्र को मजबूत बनाए: शकरकंद में भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर (Dietary Fiber) पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
  • इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाए: इसमें विटामिन सी और बीटा-कैरोटीन (जो शरीर में जाकर विटामिन ए में बदल जाता है) प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।
  • आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद: विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण शकरकंद आंखों की सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह उम्र से जुड़ी आंखों की कमजोरी (जैसे मैक्यूलर डिजनरेशन) से बचाता है।
  • वजन नियंत्रण में मददगार: इसमें कैलोरी की मात्रा कम और फाइबर अधिक होता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार खाने की इच्छा नहीं होती।
  • डायबिटिक फ्रेंडली (कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स): आलू की तुलना में शकरकंद का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है। यह ब्लड शुगर के स्तर को अचानक बढ़ने नहीं देता, हालांकि डायबिटीज के मरीजों को इसे डॉक्टर की सलाह से ही खाना चाहिए।
  • हार्ट हेल्थ (दिल की सेहत): इसमें मौजूद पोटेशियम शरीर में ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।

क्या कहते हैं गोला के ग्रामीण

शकरकंद की खेती से किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है। इस वर्ष बाजार में मांग बढ़ने से व्यापारी खेत से ही फसल खरीद रहे हैं। बांग्लादेश तक शकरकंद जाने से किसानों को आगे भी बेहतर बाजार और उचित कीमत मिलने की उम्मीद है।
— कार्तिक महथा, झारखंड आंदोलनकारी सह किसान, मुरुडीह, गोला

गोला का शकरकंद अब बड़े बाजारों तक पहुंच रहा है। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही खरीदार मिल रहे हैं। बाजार बढ़ने से खेती का रकबा भी बढ़ने की उम्मीद है।
— बजरंग कुमार महथा, पूर्व मुखिया, सोसो कलां

शकरकंद की बढ़ती मांग गोला के किसानों के लिए अच्छी संभावना है। बाहर के बाजारों में पहुंचने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
— विजय कुमार ओझा, उपप्रमुख, गोला