रांची : राज्य में बाल विवाह की दर 38 फीसद है जो काफी भयावह है। इस मामले में राष्ट्रीय दर 26.8 फीसद है जिससे झारखंड की दर बहुत अधिक है। जिलों की बात करें तो यह दर गोड्डा में सबसे अधिक तथा सिमडेगा में सबसे कम है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पांच जिले ऐसे हैं जहां आधे से अधिक बाल विवाह होते हैं। इनमें गोड्डा (63.5), गढ़वा (58.8), देवघर (52.7), गिरिडीह (52.6) तथा कोडरमा (50.8) शामिल हैं। सिमडेगा में यह दर महज 14.7 फीसद है। रांची में यह दर 28.1 है।

राज्य सरकार बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए मुखबिर योजना शुरू करने की योजना बना रही है। वहीं, इसे 104 से जोड़ा गया है। कोई भी व्यक्ति इस टॉल फ्री नंबर पर बाल विवाह होने की सूचना दे सकता है। पिछले दिनों रांची, पलामू तथा पूर्वी सिंहभूम से बाल विवाह होने की शिकायतें आई हैं। विभाग ने संबंधित सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि परामर्शी द्वारा उन जोड़ों को परिवार नियोजन संबंधित कार्यक्रमों की जानकारी दिलाएं ताकि 20 वर्ष से पहले लड़की मां न बने। वहीं बाल विवाह रोकने के लिए सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने जिले के ग्राम पंचायतों की प्रत्येक माह होनेवाली बैठकों में इसे शामिल करे।

अन्य जिलों में बाल विवाह की दर

चतरा : 49, दुमका : 47.4, जामताड़ा : 44.7, पाकुड़ : 41.1, हजारीबाग : 40.8, पलामू : 40.5, साहिबगंज : 38.4, लातेहार: 37.1, बोकारो : 36.6, सरायकेला-खरसावां : 33.2, धनबाद : 29.9, लोहरदगा : 28.5, खूंटी : 27.8, रामगढ़ : 27.7, पूर्वी सिंहभूम : 26.1, गुमला : 24, पश्चिमी सिंहभूम : 21.3

नोट : आंकड़े प्रतिशत में हैं।

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Posted By: Jagran