रामगढ़ में आठ साल बाद फिर से ट्रैक पर दौड़ेगी कोयला रैक, गिद्दी रेलवे साइडिंग का निर्माण कार्य शुरू
आठ साल से बंद गिद्दी रेलवे साइडिंग का जीर्णोद्धार कार्य शुरू हो गया है, जिसमें यार्ड की लंबाई बढ़ाई जा ...और पढ़ें

आठ साल से बंद गिद्दी रेलवे साइडिंग के जीर्णोद्धार का काम शुरू।
HighLights
आठ साल बाद गिद्दी रेलवे साइडिंग का जीर्णोद्धार शुरू।
पुराने पांच ट्रैक की जगह बनेंगे दो आधुनिक ट्रैक।
कोयला डिस्पैच सुगम होगा, सड़क परिवहन घटेगा।
मनोज तिवारी, गिद्दी (रामगढ़)। करीब आठ वर्षों से बंद पड़ी गिद्दी रेलवे साइडिंग के जीर्णोद्धार की दिशा में अब धरातल पर काम शुरू हो गया है। इंडियन पोर्ट रेल एंड रोपवे कारपोरेशन लिमिटेड (आईपीआरसीएल) की ओर से साइडिंग के पुनर्निर्माण के लिए निकाले गए टेंडर का काम संवेदक संजय कुमार उपाध्याय को मिला है।
टेंडर मिलने के बाद संवेदक ने निर्माण कार्य की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कराते हुए साइडिंग परिसर में युद्धस्तर पर साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया है। साइडिंग परिसर में पुराने यार्ड की सफाई के साथ निर्माण के लिए आवश्यक जगह तैयार की जा रही है।
प्रस्तावित योजना के अनुरूप यार्ड की लंबाई बढ़ाने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है। बताया जाता है कि मौजूदा यार्ड की लंबाई निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं है।
ऐसे में बंद गिद्दी वाशरी की चहारदीवारी के एक हिस्से को तोड़कर अतिरिक्त क्षेत्र को साइडिंग के उपयोग में लाने की तैयारी की जा रही है। चहारदीवारी के हिस्से को हटाने के बाद वहां भी साफ-सफाई कराकर निर्माण के लिए जमीन तैयार की जा रही है।
पांच पुराने ट्रैक की जगह बनेंगे दो आधुनिक ट्रैक
प्रस्तावित योजना के तहत गिद्दी रेलवे साइडिंग को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाना है। पूर्व में साइडिंग परिसर में पांच रेल ट्रैक थे। नई योजना के तहत इन्हें दो आधुनिक ट्रैक के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही वैगन लोडिंग यार्ड की लंबाई बढ़ाने का भी प्रस्ताव है, ताकि कोयला लोडिंग और रेलवे रैक के संचालन में सुविधा हो सके।
योजना के तहत नई रेल लाइन बिछाने, पुराने ट्रैक का नवीनीकरण करने के साथ वे-ब्रिज, एप्रोच रोड सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। साइडिंग के पुनर्विकास से कोयला डिस्पैच की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने की तैयारी है।
धूलकण से बचाव के लिए सीसीएल ने भेजा प्रस्ताव
गिद्दी साइडिंग के चालू होने के बाद कोयले की लोडिंग और परिवहन के दौरान उड़ने वाले धूलकण से आसपास के लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए सीसीएल प्रबंधन ने भी तैयारी शुरू कर दी है।
सीसीएल की ओर से साइडिंग परिसर में विंड ब्रेकिंग स्क्रीन और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय रांची भेजा गया है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद साइडिंग परिसर में इन सुविधाओं को स्थापित किया जाएगा।
14 किलोमीटर सड़क परिवहन से मिलेगी राहत
गौरतलब है कि गिद्दी, गिद्दी-सी, रेलीगढ़ा और सिरका समेत अरगडा क्षेत्र की विभिन्न कोयला परियोजनाओं से निकलने वाले कोयले को फिलहाल सड़क मार्ग से करीब 14 किलोमीटर दूर सौंदा रेलवे साइडिंग तक हाइवा के माध्यम से पहुंचाया जाता है। इसके बाद वहां से कोयले का रेल रैक के माध्यम से डिस्पैच किया जाता है।
गिद्दी रेलवे साइडिंग के दोबारा चालू होने के बाद अरगडा क्षेत्र से निकलने वाले कोयले का डिस्पैच सीधे रेलवे रैक के माध्यम से किए जाने की संभावना है। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी और कोयला ढुलाई की लागत में भी कमी आने की उम्मीद है। साथ ही क्षेत्र की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव, जाम, धूलकण और प्रदूषण कम होने की संभावना है।
साइडिंग चालू होने की उम्मीद से लोगों में उत्साह
करीब आठ साल से बंद पड़ी गिद्दी रेलवे साइडिंग में निर्माण कार्य शुरू होने से स्थानीय लोगों में भी इसके जल्द चालू होने की उम्मीद जगी है। लोगों का मानना है कि साइडिंग के पुनर्विकास से क्षेत्र की कोयला परियोजनाओं से होने वाला डिस्पैच अधिक सुगम होगा और सड़क मार्ग से होने वाली भारी वाहनों की आवाजाही में कमी आएगी।
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गिद्दी और आसपास की कोयला परियोजनाओं के लिए डिस्पैच व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे सीसीएल को परिवहन लागत कम करने में मदद मिलने के साथ क्षेत्र में यातायात और प्रदूषण की समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलने की संभावना है।
