रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एस चंद्रशेखर व रत्नाकर भेंगरा की अदालत ने हजारीबाग की मुंद्रिका देवी की हत्या में आजीवन कारावास की सजा पाए चार आरोपितों को बरी कर दिया है। बरी होने वालों में बालेश्वर सिंह, नुनेश्वर नायक, तेजो साव, भोला साव शामिल हैं। अपील लंबित रहने के दौरान मामले में सजायाफ्ता बबून सिंह और लक्ष्मण साव की मौत हो गई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान माना कि अभियोजन पक्ष महिला की हत्या करने के पीछे के मकसद को साबित करने में नाकाम रहा।
इस मामले में जांच अधिकारी और चिकित्सक की गवाही नहीं हुई है। इसलिए संदेह का लाभ देते हुए सभी को बरी किया जाता है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता हेमंत सिकरवार और शौर्या ने अदालत को बताया कि इस मामले में अभियोजन की ओर से आइओ (जांच अधिकारी) और पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक की गवाही दर्ज नहीं कराई। इसके अलावा अभियोजन इस बात को साबित करने में नाकाम रहा कि दोषियों ने योजना बनाकर महिला की हत्या की है।
इसको पुख्ता करने के लिए निचली अदालत में कोई गवाही दर्ज नहीं की गई है। वहीं, इस मामले में चश्मदीद गवाह भुनेश्वर साव (महिला का बेटा) का बयान प्राथमिकी से मेल नहीं खाता है। बचाव पक्ष में वहां के सरपंच ने अपने गवाही में कहा था कि महिला को लकड़बग्घे ने मार दिया था। इस आधार पर बचाव पक्ष ने अदालत से सभी को बरी करने का आग्र्रह किया था।
क्या है मामला
25 फरवरी 1991 की दोपहर में मुंद्रिका देवी की हजारीबाग के बालागढ़ जंगल में गला काट कर हत्या कर दी गई थी। महिला के साथ मौजूद उसके बेटे ने वहां से भागकर इसकी जानकारी अपने चाचा दिलेश्वर साहू को दी, जिन्होंने मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि छह लोगों ने पहले महिला को पटक दिया और बबून सिंह ने छुरी से महिला का गला काट दिया। निचली अदालत ने 10 दिसंबर 2001 को सभी छह आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद सभी सजायाफ्ता ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की। सुनवाई के बाद सभी को जमानत मिल गई।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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