नीरज अम्बष्ठ, रांची। मैट्रिक परीक्षा-2018 में 59.48 फीसद बच्चे ही सफल हो पाए। फेल होने वाले बच्चों की संख्या लाखों में है। महज चार हजार शिक्षकों के भरोसे हम इससे अधिक उम्मीद भी नहीं कर सकते। स्थिति यह है कि राज्य के हाई स्कूलों में शिक्षकों के लगभग 82 फीसद तथा प्रधानाध्यापकों के 96 फीसद पद रिक्त हैं। शिक्षकों की उपलब्धता की बात करें तो 105 छात्रों पर एक शिक्षक पठन-पाठन का कार्य करा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार द्वारा तय मानक के अनुरूप 40 छात्रों पर एक शिक्षक अनिवार्य रूप से होना चाहिए। राज्य के अपग्रेडेड हाई स्कूलों की स्थिति तो और भी खराब है। कुल अपग्रेडेड हाई स्कूलों में न तो प्रधानाध्यापक न ही शिक्षकों की नियुक्ति हो पाई है।

टॉप टेन में नेतरहाट और इंदिरा गांधी स्कूल का दबदबा
मैट्रिक की परीक्षा में टॉप टेन स्थान हासिल करने में लातेहार स्थित नेतरहाट आवासीय विद्यालय तथा हजारीबाग स्थित इंदिरा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों का दबदबा रहा है। टॉप टेन में शामिल 23 विद्यार्थियों में 17 विद्यार्थी इन दोनों स्कूलों के हैं। इनमें नेतरहाट के आठ तथा इंदिरा गांधी बालिका विद्यालय के नौ बच्चे शामिल हैं।

इन दोनों स्कूलों के दबदबे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्टेट टॉपर के अलावा दूसरे स्थान पर रहनेवाला छात्र नेतरहाट आवासीय विद्यालय का है, जबकि तीसरे स्थान पर रहनेवाली छात्र इंदिरा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की है। हाल के वर्षों में दोनों आवासीय विद्यालयों का परिणाम प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं रहा था। पिछले वर्ष ही टॉप टेन में शामिल 31 विद्यार्थियों में महज चार छात्र नेतरहाट तथा एक छात्र इंदिरा गांधी बालिका विद्यालय से थे।

प्राइवेट परीक्षा भी कारण

मैट्रिक के खराब रिजल्ट के लिए बड़ी संख्या में छात्रों के प्राइवेट रूप से परीक्षा में शामिल होना भी बताया जाता है। कई स्कूलों खासकर वित्त रहित स्कूलों द्वारा वैसे छात्रों का पंजीयन कराकर परीक्षा में शामिल कराया जाता है जिनका स्कूलों में नामांकन नहीं होता। जब परीक्षा में कदाचार की छूट नहीं मिलती है तो ऐसे छात्र असफल हो जाते हैं।

 

By Sachin Mishra