रांची, जासं । कोरोना संक्रमण काल में समाज के सभी वर्ग एक-दूसरे की सहायता में लगा है। सभी अपने-अपने तरीके से लोगों की सहायता करना चाह रहे हैं ताकि परेशानी कम हो और जल्द इस महामारी से निजात मिले। इसी क्रम में द इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट झारखंड ब्रांच ने लोगों को निश्शुल्क फिजियोथेरेपी सलाह फोन के माध्यम से देने का निर्णय लिया है। इसके लिए मोबाइल नंबर जारी किया गया है। इन नंबरों पर समायानुसार फोन कर सलाह लिया जा सकता है।

इन नंबरों पर काॅल कर लें  सलाह

डा. अजीत कुमार से मोबाइल नंबर 9431325996 एवं डा. रजनीश बरियार से 9835716907 पर सुबह 10 से 12 बजे तक कॉल कर सकते हैं। इसी तरह डा. दिनेश ठाकुर से 9835111851 एवं डा. अभय पांडेय से 9955594969 पर दोपहर 12 से 2 बजे तक डा. राजीव रंजन से 8521514446 पर एवं डा. धीरज से 8092105001 पर दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक और डा. गौतम लाल से 9204697047 एवं डा. सत्यम प्रकाश से मो. 9835756761 पर कॉल कर सकते हैं।

मसल्स स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज भी कारगर

डा. दिनेश ठाकुर ने कहा कि कोरोना संक्रमण में सांस लेने में दिक्कत होना भी एक प्रमुख लक्षण है। इसका सीधा संबंध फेफड़ों से है। जब फेफड़े ठीक से काम नहीं करते या इससे जुड़ी बीमारी होती है तो इसमें चेस्ट फिजियोथेरेपी कराई जाती है।  इस बीमारी से ठीक हुए मरीजों में पाया गया है कि उनमें मांसपेशियों में कमजोरी, सांस का फुलना, अपनी क्षमता अनुरूप पूर्व की भांति कार्य नहीं कर पाना, मानसिक अवसाद आदि परेशानी कुछ महीनों तक बनी रहती है। इन सबसे उबरने का बहुत ही अच्छा उपाय है चेस्ट फिजियोथेरेपी और हल्के फुल्के मसल्स स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज।

चेस्ट फिजियोथेरेपी में कई प्रकार के तकनीक जैसे पोस्चुरल ड्रेनेज, चेस्ट परक्सन, चेस्ट वाइब्रेशन, लाइंग एंड टर्निंग टेक्नीक, डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, कफिंग हफिंग टेक्निक, चेस्ट ब्रीदिंग, एब्डॉमिनल ब्रीदिंग, सेगमेंटल ब्रीदिंग, पर्स लीप ब्रीदिंग जैसी अन्य कई थेरेपी शामिल होती है जो प्रत्येक मरीज़ के अवस्था के अनुसार फिजियोथेरेपी चिकित्सक द्वारा कराई जाती है। इसके अलावा इंसेंटिव स्पाईरोमेट्री, ब्रीदिंग कंट्रोल एक्सरसाइज, बैलून फुलाना, और कैंडल ब्लोइंग आदि तकनीक भी इसमें बहुत ही कारगर होती है।

इन तरीकों से मरीजों के फेफड़ों में जमा बलगम या कफ को बाहर निकलने में मदद मिलती है। जिससे फेफड़ों में ऑक्सीजन लेवल को स्थिर रखा जा सकता है। नियमित फेफड़ों की फिजियोथेरेपी करने से कुछ हफ्तों एवं महीनों में सांस फूलने की परेशानी और कमजोरी को कम किया जा सकता है। ये सब एक्सरसाइज किसी फिजियोथेरेपी चिकित्सक की सलाह के बाद ही करें जो आपकी क्षमता का आंकलन करते हुए आपके लिए खास एक्सरसाइज प्रोग्राम के बारे में बता सके।

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