रांची, राज्य ब्यूरो। Fire In Jharkhand Assembly नए विधानसभा भवन में चार दिसंबर को लगी आग की वजह अब तक सामने नहीं आ सकी है। यह आगे भी समय से नहीं आएगा, यह तय है। इसका सबसे बड़ा कारण पुलिस की लापरवाही है। आग लगने की घटना के दूसरे ही दिन राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एसएफएसएल) के वैज्ञानिकों ने मलबे से जब्त राख सहित अन्य नमूनों को पुलिस को सौंप दिया था, ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे एसएफएसएल भेजा जा सके। घटना के एक सप्ताह पूरे होने को हैं, लेकिन अब तक नमूने एसएफएसएल नहीं भेजे जा सके हैं। जब वैज्ञानिक साक्ष्य की जांच ही नहीं हुई, तो रिपोर्ट कहां से आएगी।

इधर, पुलिस की जांच में भी कुछ भी स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस ने विधानसभा भवन में कार्यरत मजदूरों, निर्माता कंपनी रामकृपाल कंस्ट्रक्शन  के पदाधिकारियों से भी लंबी पूछताछ की है, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है।

क्या है जब्त साक्ष्य को एसएफएसएल भेजने की प्रक्रिया

जब कोई घटना घटती है, तो राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिक मौके पर पहुंचते हैं। वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित किए जाते हैं, जिसे जब्त व सील किया जाता है। इसके बाद वैज्ञानिक उक्त साक्ष्य को पुलिस को सौंप देते हैं। पुलिस उक्त साक्ष्य को एसएफएसएल में भेजने के लिए कोर्ट से अनुमति लेती है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद ही जब्त सामग्री राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजी जाती है। इसके बाद ही उक्त नमूने की जांच होती है। विधानसभा वाले मामले में इस प्रक्रिया का अब तक पालन नहीं हो सका है।

Posted By: Alok Shahi

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