रांची : झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने शाह ब्रदर्स के फायदे के लिए हाईकोर्ट को गुमराह करने का आरोप महाधिवक्ता पर मढ़ा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में महाधिवक्ता की मिलीभगत प्रमाणित होती है। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखकर महाधिवक्ता को तत्काल प्रभाव से पदमुक्तकरने की मांग की है। साथ ही मामले की उच्चस्तरीय जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी से कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। मरांडी शनिवार को मीडिया से मुखातिब थे।

मरांडी ने कहा है कि शाह ब्रदर्स के करमपदा माइंस खनन पट्टे का अवधि विस्तार वर्ष 2017 में इस शर्त के साथ हुआ था कि पट्टेधारी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार क्षतिपूर्ति राशि का एकमुश्त भुगतान निर्धारित समयसीमा के अंदर किया जाएगा।

इधर, पर्यावरणीय स्वीकृति पत्र में अंकित मात्रा से अवैध तरीके से अधिक लौह अयस्क खनन के मामले में उपायुक्त, चाईबासा की अध्यक्षता वाली समिति ने शाह ब्रदर्स पर 250 करोड़ 63 लाख रुपये का भुगतान 24 फीसद सूद के साथ करने को कहा था।

इस आदेश के विरुद्ध शाह ब्रदर्स ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की, जिसे एकल बेंच ने खारिज कर दिया। पट्टेदार ने इसे पुन: डिविजनल बेंच में चुनौती दी।इसपर खान एवं भूतत्व विभाग ने प्रतिशपथ पत्र दायर कर 250 करोड़ 63 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की मांगपत्र को सही ठहराया।

मरांडी का आरोप है कि एक अक्टूबर-2018 को इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। यहां महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मसले पर पट्टेधारी और राज्य सरकार के बीच समझौता हो गया है। दोनों पक्षों में इस बात पर सहमति बनी है कि संबंधित राशि एकमुश्त न देकर किस्तों में दी जाएगी।

प्रथम किस्त के रूप में 40 करोड़ रुपये 11 अक्टूबर तक दिए जाने पर सरकार खनन परिवहन चालान निर्गत करेगी, जो पूर्ण भुगतान नहीं होने के कारण अभी बंद है। महाधिवक्ता का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने शेष राशि सितंबर 2020 तक जमा करने का आदेश दे दिया।

उन्होंने कहा कि यह मामला जैसे ही खान एवं भूतत्व विभाग के पास पहुंचा, अधिकारी भौंचक रह गए, क्योंकि पट्टेदार और विभाग के बीच ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं था। लिहाजा विभागीय पदाधिकारियों और सहायक खान पदाधिकारी, चाईबासा ने संबंधित संचिका मार्गदर्शन के लिए विभागीय सचिव को भेज दिया। इधर, सचिव ने 11 अक्टूबर को विधि विभाग को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है।

शाह ब्रदर्स मामले में अंतरिम आदेश सही, राज्यहित में दी सहमति: महाधिवक्ता

रांची : सुप्रीम कोर्ट द्वारा कॉमन काउज के मामले में दिए गए आदेश के बाद झारखंड ही एकमात्र राज्य है, जिसने खनिजों के अवैध खनन के एवज में कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये की माग जारी किया। झारखंड हाई कोर्ट द्वारा शाह ब्रदर्स के मामले में दिया गया अंतरिम आदेश बिल्कुल सही है। इस मामले में सरकार ने शाह ब्रदर्स के खिलाफ 250 करोड रुपये का माग पत्र जारी किया है। सरकार द्वारा मागी गई राशि जमा नहीं करने के कारण पिछले नौ माह से उसका परिवहन चालान बंद कर दिया गया है। एकल पीठ में सुनवाई के दौरान शाह ब्रदर्स की ओर से कहा गया कि उनके मामले में न तो तीन सदस्यीय समिति के आदेशानुसार मांग में सुधार किया गया और न ही उनको सुनवाई का मौका दिया गया। जिस पर महाधिवक्ता की ओर से आपत्ति जताई गई। जिसके बाद कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद कंपनी ने उक्त आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी। महाधिवक्ता की आपत्ति जताए जाने के बाद कंपनी की ओर से पूर्ण भुगतान का प्रस्ताव दिया गया।

जिसमें एक माह में 33 फीसद राशि का भुगतान करने और बाकी राशि किस्तवार जमा करने की बात कही गई है। महाधिवक्ता अजीत कुमार ने बताया कि पद रहकर सरकार के किसी मामले में, जो राज्यहित का होगा, अपने विवेक के आधार पर निर्णय लेने के लिए सक्षम हूं। पूर्व में इसी तरह के मामले में सेल द्वारा 1400 करोड़ के डिमाड विरुद्ध मात्र 200 करोड़, उषा मार्टिन को मात्र 15 प्रतिशत राशि जबकि हिंडाल्को द्वारा मात्र 33 प्रतिशत राशि जमा करने पर ही राहत प्रदान की गई है।

ऐसे में शाह ब्रर्दस द्वारा शत प्रतिशत राशि जमा करने के प्रस्ताव पर मैंने राज्य हित में सहमति जताई है।

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Posted By: Jagran