रांची, फहीम अख्तर। मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित ‘निर्मल हृदय’ से जन्मे हर बच्चे की सौदेबाजी की कोशिश हुई है। अस्पताल में डिलीवरी के बाद मां को निर्मल हृदय आश्रम में रखने के बाद उन्हें बच्चों को छोड़ने व कुछ पैसे लेने का ऑफर दिया जाता रहा है। इसका खुलासा समाज कल्याण अधिकारी व बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा फाइलों के सत्यापन के दौरान हुआ है।

संबंधित नंबरों से संपर्क करने पर बच्चों की मां सहित अन्य परिजनों ने बताया है कि उनके बच्चे को यह कहते हुए रखा गया कि आप बच्चों को हमारे जिम्मे छोड़ दो। इन्हें सीडब्ल्यूसी में प्रस्तुत किया जाएगा। कई बच्चों की मां से लिखवा लिया गया था कि ‘मैं अपने बच्चे को स्वेच्छा से ले जा रही हूं।’ जबकि बच्चों को न तो मां को सौंपा गया न सीडब्ल्यूसी को दिया गया। सीडब्ल्यूसी संबंधित पीड़िताओं से लिखित बयान जुटा रही है। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष रूपा कुमारी ने कहा है कि अब तक कई तथ्य सामने आए हैं। इन तथ्यों के ठोस साक्ष्य  जुटाकर पुलिस को सौंपा जाएगा। इसके साथ ही निर्मल हृदय को ब्लैक लिस्टेड व सील करने की अनुसंशा कर समाज कल्याण विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

मेरा बच्चा तो मर गया है
समाज कल्याण विभाग की एक अधिकारी ने सिमडेगा निवासी एक बच्चे को जन्म देने वाली नाबालिग के पिता को कॉल कर पूछा कि आपका बच्चा कहां है। तो उसने बताया कि मैडम मेरा बच्चा तो मर गया है। जबकि उनका बच्चा मिशनरीज ऑफ चैरिटी में था, जिसे सीडब्ल्यूसी ने रेस्क्यू कर अपनी सुरक्षा में लेकर सहयोग विलेज संस्था में रखा है। इसी तरह एक बच्चे के परिजन को बताया कि उनके बच्चे को सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया गया है, लेकिन बच्चा शिशु भवन में ही रखा था। इसके अलावा अन्य कई बच्चों के परिजनों ने बताया कि हमने तो बच्चे को छोड़ दिया है। 

अब तक दस बने नामजद 
बच्चे की बिक्री का मामला सामने आने के बाद सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष रूपा कुमारी ने कोतवाली थाना में मामला दर्ज कराया। इसमें निर्मल हृदय की संचालिका, सिस्टर कांसिलिया, बच्चे को बेचने वाली अनिमा इंदवार, बच्चे की मां, खरीदार सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) जिले के ओबरिया निवासी सौरभ अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रीति अग्रवाल, सदर अस्पताल की गार्ड मंजू, मोरहाबादी के हरिहर सिंह रोड निवासी दीपधारी देवी, उनके पति ओमेंद्र सिंह सहित दस को आरोपित बनाया गया है। इस मामले में जैसे-जैसे इसमें शामिल लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, सभी के नाम केस में जुड़ते जाएंगे।

गलत काम में लगे एनजीओ की होगी जांच : मुख्यमंत्री
नवजात शिशुओं की खरीद बिक्री और गर्भवतियों के शोषण जैसे घृणित कार्यों में लगी स्वयंसेवी संस्थाओं को चिन्हित कर उस पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दिया है। उन्होंने इसकी जवाबदेही राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को सौंपी है। आयोग से 15 अगस्त तक जांच रिपोर्ट मांगी गई है। 

 

By Babita