खास बातें

  • मातृत्व हितलाभ में नाम बदलकर पर अन्य महिलाओं को कर दिया भुगतान, बाद में फिर सुधार दिया नाम
  • पुरुष कर्मचारी के बीमा में भी हेराफेरी कर दे दिया मातृत्व लाभ का कर दिया भुगतान
  • 2016 से 2018 की विभागीय ऑडिट में पकड़े गए मामले, निगरानी जांच की अनुशंसा
  • सरायकेला के आदित्यपुर शाखा के हैं सर्वाधिक मामले, कर्मियों से मांगा गया है स्पष्टीकरण

रांची, [अनूप कुमार]। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी) के तहत महिला कर्मचारियों को दिए जाने वाले जानेवाली मातृत्व हितलाभ में झारखंड के विभिन्न शाखा कार्यालयों के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। ईएसआइ के कुछ शाखा कार्यालयों में कर्मचारियों की मिलीभगत से जहां कई बीमित महिलाओं का नाम बदलकर अन्य महिलाओं के नाम भुगतान कर दिया गया, वहीं भुगतान के तुरंत बाद नाम सुधारकर पहले की तरह कर दिया गया।

एक मामला ऐसा भी सामने आया है जिसमें बीमा पुरुष के नाम से है, जबकि नाम बदलकर एक महिला को भुगतान कर दिया गया है। इसमें भी भुगतान के बाद दोबारा नाम सुधारकर पहले जैसा कर देने का फार्मूला अपनाया गया। अधिकतर मामले ईएसआइसी शाखा आदित्यपुर (सरायकेला) के हैं। जनवरी-2016 से दिसंबर- 2018 के लिए विभाग द्वारा कराए गए अंकेक्षण की रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर ऐसी गड़बडिय़ां सामने आई हैैं।

अबतक करीब डेढ़ दर्जन मामलों में 12-15 लाख की गड़बड़ी सामने आई है। यदि जांच का दायरा बढ़े तो एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। बहरहाल मामला प्रकाश में आने के बाद ईएसआइसी के क्षेत्रीय निदेशक रांची के स्तर से विजिलेंस जांच की अनुशंसा की गई है। साथ ही संबंधित कर्मियों को उनका पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया है। 

कई भुगतान पर ऑडिटर ने जताई आपत्ति

अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान शाखा आदित्यपुर में मातृत्व हितलाभ के कुल 115 मामलों में भुगतान किया गया है, जिसमें शाखा कार्यालय के द्वारा एक मामले का दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऑडिट ट्रायल के आधार पर शाखा कार्यालय आदित्यपुर द्वारा इस अवधि में (जनवरी 2016 से दिसंबर 2018 तक) किये गए कई भुगतान को संदेहास्पद बताया गया है। जिस तरह से यहां बीमित कर्मचारी का नाम बदलकर दूसरा नाम किया गया, फिर उसे भुगतान के बाद फिर नाम में संशोधन कर पुराना नाम कर दिया गया, इसे देखते हुए कार्यालय के कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

गलत तरीके से भुगतान के दर्जनभर से अधिक मामले आए सामने

बीमा संख्या 6002806839 में श्रीमती कंचन बाला का नाम संशोधन के बाद प्रिया शर्मा कर भुगतान प्रिया शर्मा के नाम से किया गया। गड़बड़ी यहीं खत्म नहीं हुई। भुगतान के बाद नाम में फिर संशोधन कर प्रिया शर्मा का नाम कंचन बाला कर दिया गया। इसी तरह बीमा संख्या 6015764041 बबली चौधरी के नाम से है लेकिन मातृत्व हितलाभ का भुगतान रुक्मिणी देवी के नाम से किया गया। इस मामले में भी भुगतान के बाद नाम दोबारा संशोधित कर बबली चौधरी कर दिया गया। वहीं बीमा संख्या 6015658707 एसके राय के नाम से है जो पुरुष है,  लेकिन इनके नाम में संशोधन कर मातृत्वहित लाभ का भुगतान एक नवंबर 2018 को सुप्रिया कुमारी के नाम से किया गया है।

बीमा संख्या 6002805459 नेहा कुमारी के नाम से है, लेकिन भुगतान ज्योत्सना कुमारी के नाम से हुआ है। इसी तरह बीमा संख्या 6015337258 साईं लक्ष्मी के नाम से है। इसमें भी 23 अक्टूबर 2016 को मातृत्व हितलाभ का भुगतान पिंकी देवी के नाम से हुआ है। इसके बाद नाम को दोबारा संशोधित कर साईं लक्ष्मी कर दिया गया है। बीमा संख्या 6002812191 इंदिरा सिंह के नाम से है। इसमें भी मातृत्व हितलाभ का भुगतान शांति महतो के नाम से हुआ है। बीमा संख्या6015491138 अनुपमा देवी के नाम से है। इसमें भुगतान सावित्री देवी के नाम से किया गया है। बाद में दोबारा इसे संशोधित कर अनुपमा देवी कर दिया गया है।

बीमा संख्या 6002812193 शिखा राज के नाम से है और भुगतान बलजीत कौर के नाम से हुआ है। यह बीमित महिला शाखा कार्यालय गोलमुरी से संबद्ध है, जबकि मातृत्व हितलाभ का भुगतान आदित्यपुर से हुआ है। बीमा संख्या 6015681265 रीमा डेविड के नाम से है। इसमें भुगतान प्रमिला पॉल के नाम से हुआ है। बाद में इसे फिर रीमा डेविड कर दिया गया है। इन सभी मामले के भुगतान पर अंकेक्षण टीम ने संदेह जताया है। साथ ही कहा है कि उपरोक्त मामलों में चूकि पासबुक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है, इसलिए भुगतान का पूर्ण सत्यापन नहीं किया जा सकता है। 

क्या है प्रावधान

निगम के द्वारा महिला कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के तहत मातृत्व हितलाभ का प्रावधान है। इसके तहत बीमित महिला कर्मचारियों को मातृत्व की स्थिति में निगम के द्वारा एक निश्चित रकम का भुगतान किया जाता है। यह राशि महिला को मजदूरी या वेतन के रूप में मिलने वाली मासिक राशि के तीन गुणा तक होती है। 

कर्मचारी का नाम बदलकर दूसरे के नाम से भुगतान के 10-15 मामले आदित्यपुर शाखा के अंतर्गत प्रकाश में आए हैं। इसके लिए संबंधित कर्मचारियों को पक्ष रखने को कहा गया है। उनका पक्ष आया भी है, लेकिन विस्तृत जांच के लिए विभागीय विजिलेंस को लिखा गया है। एक माह के अंदर जांच रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी। इसके बाद ही गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है, इसका पता चलेगा। कुछ मामले नियोक्ता के स्तर से भी गड़बड़ी के सामने आए हैं। इसकी भी जांच कराई जा रही है। अरविंद कुमार, क्षेत्रीय निदेशक, ईएसआइसी, रांची।

Posted By: Alok Shahi

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस