रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रत्याशी उतारने पर ग्र्रहण लग गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की मांग पर चुनाव आयोग ने जदयू के सिंबल को प्रदेश में प्रतिबंधित कर दिया है। पार्टी के महासचिव सुप्रियो भïट्टाचार्य ने चुनाव आयोग द्वारा 16 अगस्त 2019 के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि आयोग ने राज्य में जदयू के सिंबल (तीर) को प्रतिबंधित कर दिया है। अब जदयू इस सिंबल के साथ विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ सकती है।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान झामुमो बिहार में इसलिए चुनाव नहीं लड़ पाई थी कि जदयू की शिकायत पर चुनाव आयोग ने झामुमो के सिंबल को वहां प्रतिबंधित कर दिया था। जदयू ने अपने आवेदन में कहा था कि झामुमो का सिंबल तीर-धनुष और जदयू का सिंबल तीर है। ऐसे में मतदाता भ्रमित हो सकते हैं। इसलिए इनके सिंबल को प्रतिबंधित किया जाए। इसके बाद झामुमो ने झारखंड में जदयू के सिंबल को प्रतिबंधित करने की मांग चुनाव आयोग से की थी।

इस पर निर्णय लेते हुए चुनाव आयोग ने प्रदेश में जदयू के सिंबल को प्रतिबंधित कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) झारखंड में जदयू को चुनाव मैदान में उतार झामुमो के मतदाताओं को भ्रमित करने वाली थी, लेकिन अब उनके मनसूबों पर पानी फिर गया है। जदयू पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार में गलबहियां और झारखंड में अलग चुनाव लडऩे के नाटक को जनता समझती है।

संताल में सीएम के साथ सरकारी मशीनरी के सक्रिय होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि संताल वीर शहीदों की धरती है, सीएम रघुवर दास वहां जाकर प्रेरणा ले सकते हैं, लेकिन सीएम के वहां जाने का मकसद कुछ और ही है। सीएम सिर्फ अपनी पार्टी के जनाधार के लिए जाते तो ठीक था, लेकिन संताल क्षेत्र की खनिज संपदा को पूंजीपतियों को सौंपने के लिए दौरा कर रहे हैं। सरकार वहां के आदिवासियों को फिर से बेदखल करने की फिराक में हैं। चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।

जदयू भी झामुमो के तीर-धनुष के खिलाफ जाएगा चुनाव आयोग

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा झारखंड में जदयू के सिंबल तीर को प्रतिबंधित किए जाने के बाद जदयू ने भी झामुमो के सिंबल तीर-धनुष के खिलाफ चुनाव आयोग जाने की बात कही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कहा कि झारखंड में जदयू के सिंबल को प्रतिबंधित किए जाने की आधिकारिक जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा आदेश आया है तो पार्टी झारखंड के लिए दूसरे सुरक्षित सिंबल प्रदान करने की प्रार्थना आयोग से कर सकता है।

सालखन मुर्मू ने यह भी कहा कि जदयू शीघ्र ही झामुमो के सिंबल पर झारखंड में भी प्रतिबंध लगाने के लिए निर्वाचन आयोग को आवेदन देगा, क्योंकि उसका सिंबल धार्मिक है और आदिवासियों की संस्कृति से जुड़ा है। आदिवासियों की संवेदना से जुड़े होने के कारण मतदाता सिंबल से प्रभावित हो जाते हैं।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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