रांची, जासं। वित्तरहित शिक्षा नीति को समाप्त करने, नियमावली के तहत अनुदान देने, घाटानुदान देने सहित अन्य मांगों को लेकर वित्तरहित शिक्षाकर्मी आंदोलन करेंगे। झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले राज्यभर के करीब 1250 वित्तरहित स्कूल-कॉलेजों के हजारों वित्तरहित शिक्षाकर्मी 22 जुलाई को शैक्षणिक हड़ताल पर रहेंगे। इससे पहले 17 जुलाई को मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को ज्ञापन सौंपेंगे।

इसके बाद 23 जुलाई को काला बिल्ला लगाकर कार्य करेंगे। फिर 24 जुलाई को विधानसभा के समक्ष एक दिवसीय धरना देंगे। रविवार को मोर्चा की बैठक डॉ. सुरेंद्र झा की अध्यक्षता में हुई जिसमें आंदोलन की रणनीति बनी। बैठक में रघुनाथ सिंह, अरविंद कुमार सिंह, विजय झा, देवनाथ सिंह, नरोत्तम सिंह, असफाक आलम, नरेश घोष, पीके सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, बलदेव पांडेय, फजलूल कादिर सहित कई लोग मौजूद थे।
नियमावली के तहत नहीं मिल रहा अनुदान
सुरेंद्र झा ने कहा कि सीएम के निर्देश के बाद भी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा उच्च स्तरीय कमेटी का गठन नहीं किया गया। इससे शिक्षाकर्मियों में रोष है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी स्कूल-कॉलेजों को नियमावली के तहत अनुदान नहीं दिया गया। 600 स्कूल-कॉलेजों को 33 करोड़ में अनुदान दे दिया गया, जबकि राज्य सरकार ने 85 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। रघुनाथ सिंह ने कहा कि कई स्कूल-कॉलेजों को राशि इसलिए नहीं दी गई कि वे दोनों एक ही परिसर में हैं।

जबकि दोनों की भूमि, भवन अलग-अलग है। कई संस्थाओं के निबंधित रहने के बावजूद उसका अनुदान रोक दिया गया। नियमावली में 40 प्रतिशत रिजल्ट पर अनुदान देना है, लेकिन प्रधान सचिव रिजल्ट 41 प्रतिशत रहने पर अनुदान देने की बात करते हैं। भूमि-भवन की जांच के नाम पर स्कूलों को परेशान किया जा रहा है। तीन माह बीत जाने के बाद भी पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला, गोड्डा सहित कुछ अन्य जिलों में डीईओ ने स्कूलों को अनुदान की राशि भेजा ही नहीं है।

यह है आंदोलन का कार्यक्रम
2 अक्टूबर को राज्य के लगभग 1250 वित्तरहित स्कूल-कॉलेजों के प्रबंधन अपने संस्थानों में ताला बंद कर क्षेत्रीय विधायक एवं सांसद को चाबी सौंप देंगे। इससे पहले 9 अगस्त को राजभवन के समक्ष धरना-प्रदर्शन करेंगे। 15 अगस्त के बाद यहीं आमरण अनशन पर बैठेंगे और 5 सितंबर को सीएम हाउस का घेराव करेंगे।
मोर्चा की मुख्य मांगें

  •  वित्तरहित शिक्षा नीति समाप्त करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी अविलंब बनाई जाए।
  •  संस्थाओं को घाटानुदान दिया जाए।
  •  अनुदान अधिनियम एवं नियमावली के अनुसार दिया जाए।
  •  बार-बार भूमि एवं जमीन की जांच के नाम पर परेशान नहीं किया जाए।
  •  स्कूल-कॉलेजों को बंद करने की कार्रवाई को रोका जाए।
  •  डीईओ द्वारा स्कूल-कॉलेजों को परेशान नहीं किया जाए।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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