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कोयला माफिया अनूप माझी उर्फ लाला सिंडिकेट पर शिकंजा, कोलकाता-बांकुड़ा के रिसॉर्ट्स सहित 815 करोड़ की संपत्ति जब्त

Published: Fri, 16 Oct 2026 06:44 PM (IST)

ईडी ने कोयला माफिया अनूप माझी उर्फ लाला सिंडिकेट से जुड़ी 136.44 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त ...और पढ़ें

पूर्व में भी ईडी जब्त कर चुकी है 678.64 करोड़ की संपत्ति, अबतक कुल 815.08 करोड़ की संपत्ति जब्त।

पूर्व में भी ईडी जब्त कर चुकी है 678.64 करोड़ की संपत्ति, अबतक कुल 815.08 करोड़ की संपत्ति जब्त।

HighLights

  1. ईडी ने अनूप माझी सिंडिकेट की 136.44 करोड़ की संपत्ति जब्त की।

  2. जब्त संपत्ति में इको टूरिज्म रिसॉर्ट्स और कोलकाता की संपत्तियां शामिल।

  3. अवैध कोयला खनन से अर्जित कुल 815.08 करोड़ की संपत्ति जब्त।

राज्य ब्यूरो, रांची। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के लीज क्षेत्र में अवैध कोयला खनन, परिवहन व भंडारण मामले में मनी लांड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी ने कोयला माफिया अनूप माझी उर्फ लाला सिंडिकेट से जुड़ी 136.44 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त की है।

जब्त संपत्ति में दो होटल सह रिसार्ट, जिसमें पुरुलिया की गढ़ पंचकोट इको टूरिज्म व बांकुड़ा की बिहारीनाथ इको टूरिज्म, कोलकाता में दो संपत्ति, कागजी कंपनियों के बैंक खाते में पड़ी राशि, माझी के परिवार के सदस्यों के नाम पर शेयर व म्युचुअल फंड में निवेश शामिल हैं।

इससे पूर्व में भी ईडी ने अनूप माझी उर्फ लाला से जुड़ी 678.64 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। इस प्रकार, इस नई जब्ती के साथ ही ईडी ने अनूप माझी व उसके सिंडिकेट से जुड़ी 815.08 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति अब तक जब्त कर ली है।

ईडी ने जब्ती नोट में उल्लेख किया है कि उक्त संपत्ति अपराध की आय से अर्जित की गई थी। ईडी अपराध की आय के असली लाभार्थी का पता लगा रही है।अवैध कोयला खनन व चोरी से जुटाए गए धन की लांड्रिंग में शामिल अन्य व्यक्तियों व संस्थाओं की पहचान के लिए जांच जारी है।

कोयले की चोरी कर पश्चिम बंगाल की विभिन्न फैक्ट्रियों में बेचा

ईडी ने जांच में पाया है कि कोयला माफिया अनूप माझी उर्फ लाला के नेतृत्व वाला सिंडिकेट ईसीएल क्षेत्र में कोयले का अवैध खनन कर चोरी करता था। इसके बाद उक्त कोयले को स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की कथित मदद से पश्चिम बंगाल की विभिन्न फैक्ट्रियों में नकदी में बेचता था। इससे हुई अवैध कमाई को छुपाने के लिए कई कागजी कंपनियां (शेल कंपनियां) बनाई।

इन कंपनियों का असली मालिक व नियंत्रक अनूप माझी था। उक्त कंपनियों को उसने अपने रिश्तेदारों, कर्मचारियों व मुख्य सहयोगी गुरुपदा माझी के नाम पर रखा था। कोयले की अवैध बिक्री से मिले नकद को इन कंपनियों के जरिए फर्जी एंट्री के रूप में घुमाया और उनके बैंक खातों में जमा कर दिया ताकि इन पैसों के स्रोत और असली मालिक का पता न चल सके।

ईडी की इसी छानबीन में पता चला कि अनूप माझी सिंडिकेट ने अपराध से अर्जित कमाई का निवेश उन रिसार्ट्स में किया था, जिनका असली मालिक अनूप माझी है।