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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 06, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jharkhand Electricity: डीवीसी ने शुरू की बिजली कटौती, चार से आठ घंटे तक हो रहा कट

By Kanchan SinghEdited By:
Published: Sat, 06 Nov 2021 11:17 PM (IST)

Jharkhand Electricity बिजली कटौती के अल्टीमेटम पर डीवीसी ने अमल करना आरंभ कर दिया है। शनिवार को पहले दिन अल्टीमेटम ...और पढ़ें

बिजली कटौती के अल्टीमेटम पर डीवीसी ने अमल करना आरंभ कर दिया है।
बिजली कटौती के अल्टीमेटम पर डीवीसी ने अमल करना आरंभ कर दिया है।

रांची, राब्यू। बिजली कटौती के अल्टीमेटम पर दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने अमल करना आरंभ कर दिया है। शनिवार को पहले दिन अल्टीमेटम के मुताबिक डीवीसी ने कमांड एरिया के जिलों में कटौती शुरू की है। रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद, कोडरमा, बोकारो में चार से आठ घंटे बिजली की कटौती की गई है। फिलहाल झारखंड बिजली वितरण निगम ने वैकल्पिक उपाय के तहत कार्य आरंभ किया है, जिससे स्थिति नियंत्रण में है।

धनबाद, चतरा, गिरिडीह और हजारीबाग के कुछ हिस्सों में डीवीसी की कटौती का असर फिलहाल कम देखने को मिल रहा है। धनबाद में गोविंदपुर ग्रिड, चतरा और हजारीबाग में इटखोरी ग्रिड और गिरिडीह में सरिया जमुआ संचरण लाइन के जरिए उपभोक्ताओं को बिजली वितरण निगम के नेटवर्क से बिजली दी जा रही है। बिजली वितरण निगम कटौती का असर कम करने की दिशा में काम कर रहा है। गौरतलब है कि डीवीसी रोजाना लगभग 600 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है। बिजली आज सबसे जरूरी चीजों में से है। कटौती करने से लोगों की परेशानी काफी बढ़ जाएगी।

डीवीसी के अल्टीमेटम के मुताबिक 31 अक्तूबर तक 2110 करोड़ रुपये झारखंड बिजली वितरण निगम पर बकाया है। कहा गया है कि डीवीसी को भुगतान नहीं होने या भुगतान का रोडमैप नहीं प्राप्त होने के कारण कोयला खरीदकर बिजली उत्पादन में दिक्कत हो रही है। समझौते की शर्तों के मुताबिक 50 प्रतिशत यानि 300 मेगावाट बिजली कटौती होती रहेगी। दूसरी ओर बिजली वितरण निगम प्रबंधन इस स्थिति से निपटने के लिए डीवीसी प्रबंधन से वार्ता कर रहा है। बिजली वितरण निगम के मुताबिक कैबिनेट के फैसले के मुताबिक खरीदी गई 600 मेगावाट बिजली के बदले 100 करोड़ रुपये का भुगतान हर महीने किया जा रहा है। यह दो तिहाई बिजली की कीमत है। ऐसे में डीवीसी को कटौती करनी भी है तो वह एक तिहाई यानी 200 मेगावाट की ही करे। कटौती को ले उपभोक्ता सशंकित हैं।