रांची, [दिलीप कुमार]। Dumka Killing झारखंड के दुमका में मुस्लिम युवकों द्वारा पेट्रोल छिड़ककर जला दी गई किशोरी के मामले में राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एसएफएसएल) की रिपोर्ट ने गिरफ्तार दोनों आरोपितों के विरुद्ध लगे आरोपों की पुष्टि की है। पूरे मामले की जांच में जुटाए गए पुलिस के फोरेंसिक साक्ष्य एसएफएसएल में सही साबित हो चुके हैं। एसएफएसएल की उक्त रिपोर्ट को दुमका पुलिस ने अपनी चार्जशीट के साथ कोर्ट में जमा कर दिया था। अब मामला दुमका कोर्ट में विचाराधीन है।

एसएफएसएल की रिपोर्ट की मानें तो पुलिस ने रसायन की जांच के लिए जो साक्ष्य दिया था, उसके रसायन का विश्लेषण किया गया, जिसमें उक्त रसायन पेट्रोल ही निकला। मरने से पहले किशोरी ने भी पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की बात कही थी। स्वजनों ने भी यही बात दुहराई थी और एफएसएल की रिपोर्ट में भी उक्त रसायन पेट्रोल ही निकला। पुलिस ने दूसरे सबूत के रूप में एक पेट्रोल पंप का सीसीटीवी फुटेज व दोनों गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शाहरूख हुसैन व छोटू खान उर्फ नईम खान की तस्वीर मिलान के लिए दी थी।

जांच में पेट्रोल पंप पर सीसीटीवी फुटेज में बोतल में पेट्रोल ले रहे दोनों युवक शाहरूख व छोटू खान ही निकले हैं। आग लगाने में इस्तेमाल माचिस की जांच भी फोरेंसिक जांच में साबित हो चुकी है, इसके अलावा दोनों आरोपितों व मृतका के मोबाइल (कुल चार मोबाइल) की फोरेंसिक जांच में उनके बीच हुई बातचीत से संबंधित साक्ष्य मिल गए हैं। राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट लव जिहाद के एंगल को पुष्ट करती दिख रही है।

17 वैज्ञानिकों ने तैयार की जांच रिपोर्ट

राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला के 17 वैज्ञानिकों ने दिनरात एक कर किशोरी हत्याकांड में मिले फोरेंसिक साक्ष्य की जांच की थी। राज्य पुलिस के तत्काल रिपोर्ट देने संबंधित आग्रह पर तत्कालीन एसएफएसएल निदेशक एके बापुली ने स्वयं पूरे मामले की मानीटरिंग की ताकि रिपोर्ट की गुणवत्ता में किसी तरह की कमी न रह जाए।

Edited By: Alok Shahi

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