रांची, जासं। ठंड के कारण रिम्स में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मरीजों से मेडिसीन विभाग के लगभग सभी यूनिट के बेड फुल हो चुके हैं और मरीज जमीन पर इलाज कराने को विवश है। इन मरीजों में ज्यादा सर्दी और बुखार से पीड़ित है। डॉक्टर इन्हें बदलते मौसम में एहतियात बरतने की सलाह दे रहे है। रिम्स के पर्ची काउंटर के अनुसार मेडिसीन ओपीडी में इन दिनों रोजाना करीब 250 मरीज पहुंच रहे है। जिसमें करीब 100 मरीज मौसमी बीमारी या ठंड से पीड़ित है।

हल्की बीमारी वाले मरीजों को तो डॉक्टर देखने के बाद दवा लिखकर वापस भेज दे रहे है। लेकिन रोजाना करीब 25 मरीज मेडिसीन विभाग में भर्ती भी हो रहे है। रविवार को डॉ. बी कुमार के यूनिट में मरीजों की संख्या करीब 90 थी, जबकि कुल बेड 50 के आसपास है। वहीं डॉ. जेके मित्रा के यूनिट में करीब 70 मरीज, डॉ. उमेश प्रसाद के यूनिट में 64 व अन्य यूनिटों में भी मरीजों की संख्या औसत से ज्यादा है। अचानक मरीज बढऩे से परिजनों के साथ डॉक्टरों और नर्सो की परेशानी बढ़ गई है। सभी को फर्श में जगह देकर स्टैंड में स्लाइन की बोतल लगाई गई है।

खांसी, जुकाम से लेकर हृदय की हो रही बीमारी

बड़ो के साथ बच्चों में भी ठंड का असर खूब देखने को मिल रहा है। रिम्स के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि बच्चों में इन दिनों खांसी, जुकाम, अस्थमा रोग (श्वास रोग) और हृदय की बामारी की शिकायत बढ़ी है। सर्द की दस्तक से वातावरण में मौजूद वायरस इन बीमारियों का कारण बन रहा है। उन्होंने बताया कि मौसम में होने वाले बदलाव में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष देखभाल की जरूरत है। साथ ही कहा इन दिनों अस्पताल में जिन बच्चों को उनके अभिभावक इलाज के लिए लेकर आ रहे है उनमें से ज्यादातर बच्चें मौसमी बीमारियों से ही पीडि़त है, किसी को खांसी, किसी को जुकाम तो किसी को श्वास लेने में परेशानी है। कार्डियोलॉजी के डॉ. प्रशांत कुमार के अनुसार ठंड के कारण बच्चों में सांस की समस्या के केस ज्यादा पहुंच रहे है। मरीजों को सांस लेने के दौरान छाती में दर्द होता है जो स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि ज्यादा दर्द होने पर इसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।

Posted By: Alok Shahi

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