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रांची में राष्ट्र सेविका समिति का विजयादशमी उत्सव, शस्त्र पूजन की परंपरा और स्वदेशी विचारों पर हुई चर्चा

By Sanjay KumarEdited By: Mansi Kumari
Published: Mon, 26 Oct 2026 12:10 PM (IST)

डॉ. जिज्ञासा ओझा ने रांची में विजयादशमी उत्सव पर राष्ट्र सेविका समिति के उद्देश्यों को बताया। उन्होंने शक्ति के सदुपयोग, ...और पढ़ें

राष्ट्र सेविका समिति। जागरण

राष्ट्र सेविका समिति। जागरण

HighLights

  1. शक्ति अर्जन के साथ सदुपयोग भी महत्वपूर्ण: डॉ. ओझा।

  2. राष्ट्र सेविका समिति का उद्देश्य मातृशक्ति को संगठित करना।

जागरण संवाददाता, रांची। राष्ट्र सेविका समिति की प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. जिज्ञासा ओझा ने कहा कि शक्ति का अर्जन जितना आवश्यक है, उसका सदुपयोग और उसे उचित दिशा देना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। वर्ष 1936 में लक्ष्मीबाई केलकर, जिन्हें मौसीजी के नाम से जाना जाता है, द्वारा राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना के पीछे का उद्देश्य मातृशक्ति का संगठन करना था।

डॉ. जिज्ञासा ओझा रविवार का विजयादशमी उत्सव के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में सेविकाओं को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम का आयोजन रांची के आरोग्य भवन परिसर स्थित वनवासी कल्याण आश्रम के सभागार में किया गया था। इस मौके पर उन्होंने विजयादशमी उत्सव के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व के साथ शस्त्र पूजन की परंपरा पर प्रकाश डाला।

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साथ ही स्वदेशी को केवल वस्तुओं के उपयोग तक सीमित न मानते हुए इसे स्वदेशी दर्शन, चिंतन एवं जीवन-मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता बताई। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भारतीय अवधारणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने मातृत्व, संस्कार, अनुशासन, संगठन तथा विश्वकल्याण की भावना को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। समिति की स्थापना के 90 वर्ष पूरे होने पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि के रूप में शारदा ग्लोबल विद्यालय की समन्वयक दीपा बंका व अध्यक्षता चिकित्सक एवं राज हास्पिटल से संबद्ध प्रीति सराफ ने की। दीपा बंका ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपनी अंतर्निहित क्षमताओं को पहचानें तथा समाज और राष्ट्र के उत्थान में सक्रिय योगदान दें। कार्यक्रम के दौरान शारीरिक प्रदर्शन भी किया गया।

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इस अवसर पर प्रांत सह कार्यवाहिका त्रिपुला दास, पूनम सिंह, मृदुला चौरसिया एवं अंजना घोष, महानगर कार्यवाहिका शालिनी सचदेव सहित कई प्रमुख महिलाएं थीं।