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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 14, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

डोरंडा को पहले दोरांदा नाम से जाना जाता था

By JagranEdited By:
Published: Sat, 14 Mar 2020 01:14 AM (IST)

डोरंडा पहले रांची का हिस्सा नहीं हुआ करता था। ये रांची से चार किमी दूर एक गांव था। इसे पहले दोरांदा कहा जाता था।

डोरंडा को पहले दोरांदा नाम से जाना जाता था
डोरंडा को पहले दोरांदा नाम से जाना जाता था

जागरण संवाददाता, रांची : डोरंडा पहले रांची का हिस्सा नहीं हुआ करता था। ये रांची से चार किमी की दूरी पर स्थित एक कम आबादी वाला गांव था। डोरंडा शब्द की उत्पत्ति मुंडा शब्द दुरांग और द शब्द से हुई। दुरांग का अर्थ है गाना और द शब्द का अर्थ है पानी। ओवर ब्रीज के नीचे जो गंदे नाले के जैसा दिखता है वो वास्तव में एक समय वेगवती नदी हरमू हुआ करती थी। यानी जिस स्थान पर नदी की कल-कल मधुर ध्वनि सुनाई देती हो। इसलिए इस स्थान का नाम दोरांदा रखा गया जो बाद में डोरंडा हो गया। ये बाते रांची के बारे में बताते हुए श्वेतांबर जैन समाज के अध्यक्ष संपतलाल रामपुरिया ने कहा।

जैन समाज के लोग पहले अपर बाजार में आकर बसे

रामपुरिया ने बताया कि डोरंडा का इतिहास काफी रोचक है। रांची में जैन समाज के लोग पहले अपर बाजार के पास आकर बसे। यह इलाका अंग्रेजों के काल में एक व्यापारिक सेंटर के रूप में विकसित किया गया था। इसके साथ ही यहां से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में व्यापार हुआ करता था। श्वेताम्बर जैन समाज के लोग काफी बाद में आकर बसे हैं। उन्होंने अपने रहने के लिए डोरंडा का चयन किया। तब तक डोरंडा पहले से काफी विकसित हो गया था।

अंग्रेज सरकार के अस्तबल के पास एजी ऑफिस बनाया गया

1912 में कोलकाता से एजी ऑफिस को स्थानांतरित करके रांची के डोरंडा में लाया गया। इसी समय सचिवालय कार्यालय भी यहां स्थापित किए गए। वर्तमान में यह भवन मेकॉन के बगल में हाई कोर्ट परिसर के रूप में जाना जाता है। अंग्रेज सरकार का जहां अस्तबल था वहां एक खपड़ैल भवन में एजी ऑफिस बनाया गया। कार्यालय के पास कर्मचारियों के रहने के लिए 56 आवास बनाए गए। इसे छप्पन शेड कहा जाता था। इसके बाद डोरंडा से आधे किमी के दूरी पर हिनू में क्वाटर बनाए गए। उस वक्त डोरंडा रांची नगर निगम के बाहर था। इसलिए डोरंडा नोटिफाइड एरिया कमेटी की स्थापना की गयी। हिनू में चार्ली साहब के अहाते में एक हवाई अड्डा बनाया गया जो अब बिरसा मुंडा हवाई अड्डा के नाम से जाना जाता है। अब डोरंडा और हिनू घने आबादी वाले उप नगर के रूप में बस गये हैं। योगी पुरुष अनंत बाबा के नाम पर मोहल्ले का नाम अनंतपुर रखा गया

ओवर ब्रीज से पूरब हरमू नदी के निकट कब्रिस्तान तथा योगी पुरुष अनंत बाबा का आश्रम था। आश्रम के चारो तरफ विशाल भू खंड था। इस जमीन को उस समय के प्रसिद्ध ठेकेदार सतीश चंद्र बल ने कमिश्नर से सिफारिश कर खरीद लिया। फिर वहां उन्होंने अपना निवास बनाया। इसके साथ ही जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े करके रांची के प्रतिष्ठित बंगालियों को बसाया। फिर योगी पुरुष अनंत बाबा के नाम पर इस मोहल्ले का नाम अनंतपुर रखा गया।