रांची, विनोद श्रीवास्तव। मुकेश कुमार शर्मा को नि:शक्त कहना, उसके बुलंद इरादे का मखौल उड़ाना होगा। एंक्लेट न पहने तो चार कदम चल पाने में भी असमर्थ मुकेश ने अपने हौसलों की ऊंची उड़ान से सशक्तों की टीम खड़ी कर दी है। बात 1990 की है, मुकेश तब आठवीं का छात्र था। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब कि एक ड्रेस पर ही गुजर-बसर करना मजबूरी थी।

मुकेश के लिए वह दिन बहुत ही मनहूस था। कपड़े गीले थे, सो पिता की लुंगी पहन रखी थी। उस दिन घर की रसोई से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी। ऐसा संयोग महीने-दो महीने में ही आता, मुकेश से रहा नहीं गया, वह रसोई की ओर लपका, दुर्भाग्य से उसकी लूंगी, चूल्हे की धधकती आग की चपेट में आ गई। फिर उसके साथ क्या हुआ, उसे पता नहीं।

होश आया तो उसने खुद को अस्पताल में पाया। उसके कमर तक का भाग झुलस गया था। दो वर्षों तक वह अस्पताल में रहा। इसके बाद के दो वर्षों तक घर में ट्रीटमेंट चला। महंगी चिकित्सा ने परिवार की कमर तोड़ दी थी। मुकेश ने 1994 में हीटर का चूल्हा बनाना शुरू किया। यहां वह असफल रहा। इसके बाद चूल्हे की बॉडी बनाने का काम प्रारंभ किया। यहां भी बहुत सफलता नहीं मिली। इस बीच 2005 में उसके पिता का देहांत हो गया। पूरे घर की जवाबदेही उसके सिर आ गई। पुराने दिनों की याद कर उसकी आंखें भर आती हैं।

खरीदी मशीन :  मुकेश कहता है, उसके पिता लकड़ी का स्विच बोर्ड बनाया करते थे, 2007 के बाद उसने भी यही धंधा अपनाया। इसमें बहुत स्कोप नजर नहीं आया। फिर प्रधानमंत्री रोजगार योजना से एक लाख रुपये का ऋण लिया और शर्मा इंडस्ट्रीज एंड ट्रेडिंग कंपनी की स्थापना की। पुरानी मशीन भाड़े पर ली।

मां, बहनों और भाई के सहयोग से उसने प्लास्टिक का स्वीच बोर्ड बनाने का काम शुरू किया। मुकेश का धंधा चल पड़ा। धंधा चला तो मानव संसाधन की जरूरत पड़ी। लक्ष्मी नगर, पंडरा (रांची) निवासी मुकेश ने पास ही अवस्थित स्लम बस्ती से कुछ लोगों को काम रखा। माली हालत थोड़ी पटरी पर आई तो उसने बैंक से 50 लाख रुपये का ऋण लिया और इलेक्ट्रिक गुड्स निर्माण की अत्याधुनिक मशीन खरीद ली।

दिया रोजगार : आज उसकी फैक्ट्री में 24 युवक-युवतियां कार्यरत हैं। फिलहाल दो अलग-अलग ब्रांड से उसके प्रोडक्ट की सप्लाई झारखंड, बिहार और ओडिशा में हो रही है। हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये की वह जीएसटी भर रहा है। मुकेश की आंखों में आगे बढऩे की चाहत स्पष्ट झलकती है। उसने पांच वर्षों की कार्ययोजना तैयार कर रखी है। वह कहता है-उसकी योजना इलेक्ट्रिकल गुड्स से जुड़े अन्य उत्पादों की फैक्ट्री स्थापित करने की है, जिसमें वह 100 से सवा सौ लोगों को रोजगार दे सकेगा। 

Posted By: Alok Shahi